पवन राय, मंडला। मध्य प्रदेश के छोटे से जिले मंडला की बेटी शुचि उपाध्याय ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। महात्मा गांधी मैदान में लड़कों के साथ क्रिकेट की बारीकियां सीखने वाली तेज गेंदबाज शुचि का चयन इंडिया-ए टीम में हुआ है। वह आगामी 29 सितंबर से धर्मशाला में शुरू हो रहे मल्टी-डे मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ अपनी धारदार गेंदबाजी का जला दिखाएंगी। शुचि के इस चयन से न सिर्फ मंडला बल्कि पूरे प्रदेश में खुसी का माहौल है।

चोट से उबरीं, हार नहीं मानी और की शानदार वापसी

गेंदबाजी में अपनी अलग छाप छोड़ने वाली शुचि उपाध्याय इससे पहले श्रीलंका में आयोजित सीरीज में भारतीय टीम का हिस्सा रह चुकी हैं। इसके बाद उनका चयन इंग्लैंड दौर के लिए भी हुआ था लेकिन बदकिस्मती से चोट के कारण वह खेल नहीं सकीं थीं।

चोट के कारण मैदान से दूर होने के बावजूद शुचि ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने कड़ी मेहनत और लगन से अपनी फिटनेस हासिल की और एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल रही।

पिता और कोच का रहा महत्वपूर्ण योगदान

शुचि कि इस सफलता के पीछे उनके पिता सुधीर उपाध्याय और मंडला के कोच बसंत ठाकुर की सालों की मेहनत शामिल है-

कोच बसंत ठाकुर का मार्गदर्शन: कोच बसंत ठाकुर ने बताया कि जब शुचि 18 वर्ष की उम्र में उनके पास आईं, तब से ही उन्होंने क्रिकेट को लेकर उनकी लगन देखी। कोच के साथ-साथ उनके पिता भी रोज ग्राउंड आते थे और खेल की हर छोटी-बड़ी बारीकी पर ध्यान देते थे।

पिता का अटूट विश्वास: शुचि के पिता सुधीर उपाध्याय के अनुसार, जब वह 13-14 साल की थीं, तभी से वह गली-मोहल्लों और आंगन में लड़कों के साथ बेझिझक क्रिकेट खेलती थीं। पिता ने बेटी की इस प्रतिभा को पहचाना और कभी पीछे नहीं हटने दिया। मंडला के इकलौते महात्मा गांधी मैदान में लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेलते हुए ही शुचि के हुनर को धार मिली।

29 सितंबर से धर्मशाला में मुकाबला

धर्मशाला में 29 सितंबर से शुरू होने जा रहे मल्टी-डे मैच में सभी की निगाहें शुचि की गेंदबाजी पर टिकी होंगी। उनके पिता और स्थानीय कोच को उम्मीद है कि शुचि न केवल मंडला बल्कि पूरे देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करेंगी।

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