इंफाल। मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने शनिवार को कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम के इस्तीफ़े की मांग की, जिन्हें यौन उत्पीड़न की शिकायतों के कारण जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) से बर्खास्त कर दिया गया था।
JNU के स्कूल ऑफ़ सोशल साइंसेज के तहत ‘सेंटर फ़ॉर द स्टडी ऑफ़ सोशल सिस्टम्स’ में प्रोफ़ेसर अकोइजम ने अपनी बर्खास्तगी को “विच हंट” (साज़िश के तहत निशाना बनाना) करार दिया है और सवाल उठाया है कि क्या उचित प्रक्रिया का पालन किया गया था।
सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “इनर मणिपुर के सांसद प्रोफ़ेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से बर्खास्तगी बेहद परेशान करने वाली और शर्मनाक है। एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, यूनिवर्सिटी में उनके ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के आरोपों की आंतरिक समिति ने जांच की और कड़ी सज़ा की सिफारिश की।”
उन्होंने आगे कहा, “उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। एक उच्च विधायी पद पर बैठे व्यक्ति और एक प्रोफ़ेसर द्वारा इस तरह का गंभीर कदाचार अस्वीकार्य है और इससे मणिपुर की छवि खराब होती है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि चूंकि एक सांसद “लोगों की आवाज़” का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए संसद की गरिमा बनाए रखी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, “जब इसकी गरिमा से समझौता किया जाता है, तो जनता का भरोसा कम हो जाता है। नैतिक आधार पर, प्रोफ़ेसर अकोइजम ने जन प्रतिनिधि के तौर पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है और उन्हें लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए तुरंत लोकसभा से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।”
रिपोर्टों के अनुसार, मई में कम से कम 11 छात्राओं ने प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराई थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि अकोइजम ने बैठकों या समारोहों के बहाने छात्राओं को कैंपस स्थित अपने आवास पर बुलाया और उनका यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की। कुछ छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया था कि उन्होंने क्लास में अश्लील और अनुचित टिप्पणियां की थीं।
बर्खास्तगी के आदेश में सज़ा देते समय संबंधित सेवा नियमों और सेंट्रल सिविल सर्विसेज़ (क्लासिफिकेशन, कंट्रोल एंड अपील) रूल्स के नियम 11(ix) का हवाला दिया गया।
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