भाजपा सांसद और अभिनेता मनोज तिवारी वाराणसी दौरे पर गोदौलिया में रिक्शा चलाते और बनारसी जलेबी का स्वाद लेते नजर आए. इस दौरान उन्होंने दिल्ली में जारी प्रदर्शन, सीजेपी, विपक्ष और एसआईआर को लेकर अपनी बात रखी.

वाराणसी. भाजपा सांसद और अभिनेता मनोज तिवारी अपने नए एल्बम की शूटिंग के सिलसिले में वाराणसी पहुंचे हैं. दौरे के दौरान वह सोमवार को गोदौलिया चौराहे पर सिर पर गमछा बांधकर रिक्शा चलाते नजर आए और उन्होंने बनारस की मशहूर जलेबी का भी स्वाद चखा. उनके इस अंदाज को देखने के लिए मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और समर्थकों ने नारे लगाकर उनका स्वागत किया.

प्रदर्शन पर तीखी टिप्पणी

वाराणसी में मीडिया से बातचीत के दौरान मनोज तिवारी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने इसे आंदोलन मानने के बजाय देश पर हमला बताया और कहा कि देश की सड़कों पर अशांति फैलाने की कोशिशों को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

उन्होंने एलन मस्क, ध्रुव राठी और सीजेपी से जुड़े लोगों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि ज्ञानेश कुमार के मामले में इन लोगों की क्या भूमिका या प्रासंगिकता है. तिवारी ने एलन मस्क को अमेरिकी कारोबारी और ध्रुव राठी को जर्मनी का नागरिक बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग देश की संप्रभुता को चुनौती दे रहे हैं और विदेश में पढ़े कुछ युवाओं ने देश के खिलाफ साजिश की है.

विपक्ष पर लगाए आरोप

मनोज तिवारी ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के लोग एकजुट होकर देश के खिलाफ काम कर रहे हैं और भारत को नेपाल तथा बांग्लादेश जैसी स्थिति में ले जाना चाहते हैं. हालांकि, ये आरोप उनके अपने बयान का हिस्सा हैं.

उन्होंने प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी पर महिला कांस्टेबल के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की करने का आरोप भी लगाया. तिवारी ने कहा कि देश में हिंसा या अशांति फैलाने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए.

एसआईआर पर कही बात

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर मनोज तिवारी ने सवाल उठाया कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में कैसे शामिल हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के नाम हटाने की कार्रवाई पर ही आपत्ति जताई जा रही है.

वाराणसी दौरे के दौरान मनोज तिवारी का स्थानीय अंदाज चर्चा में रहा, वहीं दिल्ली के प्रदर्शन और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर दिए गए उनके बयानों ने राजनीतिक बहस को भी सामने रखा.