गुमला। गुमला के चैनपुर थाना क्षेत्र के चर्चित नक्सली मामले में अदालत ने 10 लाख रुपये के इनामी हार्डकोर माओवादी और जोनल कमांडर रामप्रसाद लकड़ा उर्फ अशोक उर्फ प्रसाद लकड़ा को दोषी करार दिया है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-3 भूपेश कुमार की अदालत ने मंगलवार को सत्र वाद संख्या 139/2016 में फैसला सुनाते हुए उसे आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-ए), 26(2), 35 और 17 सीएलए एक्ट के तहत दोषी माना।

अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है। अब इसी दिन अदालत यह तय करेगी कि दोषी ठहराए गए अपराधों के लिए प्रसाद लकड़ा को कितनी सजा दी जाएगी।

22 साल तक माओवादी गतिविधियों में रहा सक्रिय

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, प्रसाद लकड़ा लंबे समय तक गुमला के जंगलों में सक्रिय माओवादी संगठन की महत्वपूर्ण कड़ी रहा। उस पर 13 पुलिसकर्मियों की हत्या में शामिल होने का आरोप भी रहा है। बताया गया कि वह करीब 22 वर्षों से माओवादी गतिविधियों से जुड़ा था और संगठन में उसकी मजबूत स्थिति मानी जाती थी।पुलिस के मुताबिक, प्रसाद लकड़ा अक्सर 35 से 40 हथियारबंद नक्सलियों के सुरक्षा घेरे में रहता था।

2015 में मुठभेड़ के बाद हुआ था गिरफ्तार

पुलिस ने 11 जून 2015 को चैनपुर थाना क्षेत्र के कटकाही नाला जंगल के पास मुठभेड़ के बाद प्रसाद लकड़ा समेत तीन नक्सलियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस को सूचना मिली थी कि प्रसाद लकड़ा का दस्ता जंगल में जमा है। इसके बाद तत्कालीन पूर्व एएसपी पवन सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने इलाके में अभियान चलाया।

पुलिस के पहुंचते ही नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई के बाद नक्सली जंगल की ओर भागने लगे। इसी दौरान प्रसाद लकड़ा, जीवन तिर्की और फ्रांसिस खलखो पुलिस के हत्थे चढ़ गए। पुलिस के अनुसार, प्रसाद के साथ चल रहे हथियारबंद सुरक्षा घेरे के सदस्य मौके से भाग निकले थे।

गिरफ्तारी के बाद से जेल में बंद

11 जून 2015 को गिरफ्तारी के बाद से प्रसाद लकड़ा न्यायिक हिरासत में है। मंगलवार को अदालत में सुनवाई के दौरान उसे रांची के बीएमसी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया।

इसी मामले के सह आरोपी जीवन तिर्की को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। वहीं प्रसाद लकड़ा को दोषी करार दिया गया है। अब 13 अक्टूबर को अदालत में सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी।