अभय मिश्रा, मऊगंज। प्रशासन गौ सेवा के नाम पर बड़े बड़े दावे करती हैं, करोड़ों रुपए का बजट जारी होता है गौशालाओं की बेहतरी के लिए… लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो बेजुबान गौवंश का क्या हाल होगा? मऊगंज जिले से भ्रष्टाचार का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पशुपालन विभाग के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं।
आरोप सीधे मऊगंज जिले के पशुपालन विभाग के प्रभारी डिप्टी डायरेक्टर जगजीवन लाल साकेत पर हैं। आरोप किसी छोटे-मोटे नजराने का नहीं, बल्कि 14 लाख 70 हजार रुपये की मोटी रिश्वतखोरी का है! और ताज्जुब की बात यह कि यह रिश्वत किसी एक रास्ते से नहीं, बल्कि अपनी बेटियों, अपने मित्र, खुद के खाते और यहाँ तक कि कोरे चेक के जरिए ऐंठी गई है!गौशाला संचालक का आरोप है कि सत्यापन और अनुदान जारी करने के बदले सीधी 50% की कट मनी मांगी जाती है। पैसे न दो तो भुगतान रोक दिया जाता है।
मऊगंज जिले में बेजुबान गौवंश जिस वक्त भूख और बदहाली से जूझ रहा है, ठीक उसी वक्त महकमे के आला अफसर अपनी तिजोरियां भरने में मशगूल हैं। आरोपों के घेरे में हैं पशुपालन विभाग के प्रभारी डिप्टी डायरेक्टर जे.एल. साकेत। गौशाला संचालक संदीप शुक्ला का आरोप है कि जिले में गौशाला चलाने के बदले कुल अनुदान राशि की आधी यानी 50 फीसदी रकम कट मनी के तौर पर मांगी जाती है। पैसे नहीं मिलने पर भुगतान रोक दिया जाता है और सत्यापन के नाम पर प्रताड़ित किया जाता है।
रिश्वत का यह पूरा खेल डिजिटल इंडिया के दौर में फोन पे और चेक के जरिए धड़ल्ले से खेला गया। आरोपों के मुताबिक प्रभारी DD ने अपनी बेटी रश्मि साकेत के खाते में 63,500 रुपये फोन पे पर करवाए। दूसरी बेटी पूनम साकेत के खाते में 17,500 रुपये मंगवाए गए।
खुद डिप्टी डायरेक्टर जे.एल. साकेत के खाते में 1,01,500 रुपये फोन पे के जरिए ऑनलाइन ट्रांसफर हुए। इतना ही नहीं, अटरिया इन्द्रदत्त स्थित फार्म हाउस पर 50,000 रुपये नगद लिए गए- जिसका बाकायदा वीडियो सबूत होने का दावा किया गया है!
लेकिन यह तो महज़ बानगी थी। भ्रष्टाचार की जड़ें इससे कहीं ज़्यादा गहरी हैं। आरोप है कि गौशाला संचालन की शुरुआत में डीडी साकेत ने संदीप शुक्ला से कोरा चेक ले लिया था। बाद में इस चेक में मोटी रकम भरकर अपने मित्र और गौसेवक सदानंद पाठक के खाते में 5,50,000 रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।हद तो तब हो गई जब 7 लाख रुपये का एक अन्य चेक रामउजागर अवधिया के नाम से भुनाया गया। आरोप है कि इसी 7 लाख की राशि से रीवा में डिप्टी डायरेक्टर के बेटे पुनीत कुमार साकेत के नाम पर आलीशान घर खरीदा गया-जिसकी रजिस्ट्री में संदीप शुक्ला के दिए गए चेक का बाकायदा क्रमांक भी दर्ज है।
खुद को और अपने मित्र सदानंद पाठक को बचाने के लिए साकेत ने एक और फर्जीवाड़ा रचा। अनुबंध पत्र के स्टाम्प का दुरुपयोग कर फर्जी शपथ पत्र तैयार किया गया, जिसमें झूठा दावा किया गया कि संदीप शुक्ला ने सदानंद पाठक से भूसा खरीदा था।यह कोई पहला मौका नहीं है जब जे.एल. साकेत विवादों में आए हों। इससे पहले भी बेटी रश्मि साकेत के खाते में 2000 रुपये रिश्वत लेने और गौशालाओं में फर्जी तरीके से गौवंश की संख्या बढ़ाकर सरकारी धन के गबन के आरोप उन पर लग चुके हैं। समाजसेवी कुंजबिहारी तिवारी द्वारा मुख्य सचिव भोपाल और मुख्यमंत्री कार्यालय तक में लिखित शिकायतें भेजी जा चुकी हैं। जिले में जल सत्याग्रह, धरना और प्रदर्शन हो चुके हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक केवल खामोशी ही हाथ लगी है।
बैंक खातों के सबूत, फोन पे की रसीदें, रजिस्ट्री में दर्ज चेक नंबर और वीडियो फुटेज… जब सबूत इतने पुख्ता और आरोप इतने गंभीर हैं, तो सवाल उठना लाजमी है। क्या मऊगंज का पशुपालन विभाग रिश्वतखोरी का अड्डा बन चुका है? क्या बेजुबां गौवंश के हक का दाना-पानी अफसरों के बेटों की कोठियां बनाने में इस्तेमाल हो रहा है?
अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची इस शिकायत और न्यूज 24 लल्लूराम डॉट कॉम के पास आए इन ठोस सबूतों के बाद शासन-प्रशासन प्रभारी डिप्टी डायरेक्टर जे.एल. साकेत पर क्या कार्रवाई करता है या फिर कागजी खानापूर्ति कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा।


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