अभय मिश्रा, मऊगंज। Mauganj Panchayat Scam: मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में फर्जी खरीदी के खेल की खबरें अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थीं कि अब ग्रामीण अंचलों से स्वच्छता अभियान के नाम पर एक बहुत बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आ रहा है। न्यूज़ 24 MP-CG और लल्लूराम डॉट कॉम की इन्वेस्टिगेशन टीम ने मऊगंज जिले के जनपद पंचायत मऊगंज के भीतर तह तक जाकर पड़ताल की है। यहां डस्टबिन और कचरा उठाने वाले ई-रिक्शा की खरीदी में ऐसा गोलमाल पकड़ा गया है, जिसे देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे।
कागजों पर 1 साल पहले लाखों-करोड़ों का भुगतान कर दिया गया है, लेकिन गांव की जमीनी हकीकत टटोली, तो कहीं कचरा गाड़ी के नाम पर पंचर साइकिल मिली, तो कहीं सीमेंट और इलेक्ट्रॉनिक की दुकानों से डस्टबिन खरीदने के कोरे फर्जी बिल वाउचर अपलोड मिले।
मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में स्वच्छता के नाम पर बंदरबांट की दास्तान बेहद हैरान करने वाली है। न्यूज़ 24 MP-CG और लल्लूराम डॉट कॉम ने मऊगंज जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली 20 से अधिक ग्राम पंचायतों का जमीनी दौरा किया और ई-ग्राम स्वराज पोर्टल से भुगतान के पुख्ता दस्तावेज खंगाले।

ग्राम पंचायत नौडिया में कागजों पर 2,67,461 की भारी-भरकम लागत से डस्टबिन खरीदे जाने का दावा किया गया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि भुगतान आदित्य इंटरप्राइजेज के खाते में कर दिया गया जहां न तो डस्टबिन बनती है और न ही मिलती है। ग्रामीण बताते हैं कि आज तक उनके गाँव में एक भी डस्टबिन नहीं लगाई गई है।यही नहीं, ग्राम पंचायत डिगवार 391 में ₹3,94,000 का ई-रिक्शा और ₹2,99,000 की डस्टबिन खरीदने का भुगतान मई 2026 में किया गया। पूरा पैसा सीमेंट-सरिया की दुकान ‘रोहित ट्रेडर्स’ के खाते में डाल दिया गया। मौके पर न तो डस्टबिन मिली और न ही ई-रिक्शा। सचिव ने दावा किया कि सामान सरपंच के घर पर पड़ा है, जबकि ग्रामीण कहते हैं कि गाँव में कभी कोई गाड़ी नहीं आई।
वहीं फरहदा ग्राम पंचायत में ₹3,00,000 के डस्टबिन और ₹52,000 की कचरा गाड़ी का भुगतान मार्च 2025 में ‘भाव्या इलेक्ट्रानिक’ को कर दिया गया। एक इलेक्ट्रॉनिक दुकान से डस्टबिन, मोटर पंप और ई-रिक्शा ,पेवर ब्लॉक, प्रिंटर, टैंकर रिपेयर जैसी सामग्री की खरीदी और मरम्मत दिखा दी गई। जब हमारे रिपोर्टर ने सचिव से जवाब मांगा, तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि ‘बैठकर बात कर लेंगे।’
वहीं रोजगार सहायक कभी डस्टबिन न होने तो कभी पंचायत में होने की बात कहकर पल्ला झाड़ते नजर आए।जब ग्राम पंचायत में जाकर देखा गया तो कुछ भी मौजूद नहीं था ,और गांव वालो ने आरोप लगाया कि आज तक डस्टबिन नहीं लगी है और न कचरा गाड़ी खरीदी गई है ।
बड़ी लंबी घोटालों की फेहरिस्त
पिड़रिया सेगर: यहाँ ₹4,48,000 का ई-रिक्शा और ₹1,96,900 के डस्टबिन का भुगतान ‘रोहित ट्रेडर्स’ को किया गया। मौके पर कचरा उठाने वाली कोई गाड़ी नहीं मिली, अलबत्ता 3-4 जगहों पर थर्ड-क्लास की हल्की डस्टबिन थमा दी गई हैं।
पिपरा: यहाँ ₹1,49,500 के डस्टबिन का भुगतान सीमेंट-सरिया विक्रेता को किया गया, लेकिन धरातल पर डस्टबिन का नामोनिशान तक नहीं है।
शिवपुरा नेबूहा: यहाँ ₹2,25,000 का ई-रिक्शा, ₹2,25,000 के डस्टबिन और ₹52,000 की कचरा गाड़ी की खरीदी एक इलेक्ट्रॉनिक दुकान से दिखाई गई, जबकि पोर्टल पर बिल्कुल कोरे (ब्लैंक) बिल अपलोड किए गए हैं।और ग्रामीणों के मुताबिक आज तक डस्टबिन नहीं लगी है और न कचरा गाड़ी आई है।
डिघौल: यहाँ ₹2,62,000 का ई-रिक्शा और ₹2,09,300 के डस्टबिन का भुगतान सीमेंट-सरिया दुकान से होना बताया गया, पर गाँव के ग्रामीणों के आरोप और पड़ताल में जमीन पर कुछ भी मौजूद नहीं है।
सीतापुर: यहाँ 15 डस्टबिन के लिए ₹2,25,000 और कचरा गाड़ी के लिए ₹52,000 का भुगतान किया गया। लेकिन जब न्यूज़ 24 की टीम दुकान पर पहुँची, तो पता चला कि कचरा गाड़ी के नाम पर एक पुरानी पंचर साइकिल (साइकिल रिक्शा) खरीदकर दुकान में खड़ी कर दी गई है!और डस्टबिन आज तक नही लगा है ।
लौरकला: यहाँ ₹2,55,000 के डस्टबिन और ₹2,95,000 के ई-रिक्शा का भुगतान ‘प्रतिज्ञानम फाउंडेशन’ के नाम पर किया गया, जो कि कोई रजिस्टर्ड फर्म ही नहीं है।
ढेरा: यहाँ ₹3,25,000 का ई-रिक्शा और ₹2,99,000 के डस्टबिन का भुगतान ‘भाव्या इलेक्ट्रानिक’ को किया गया—वही इलेक्ट्रॉनिक दुकान जहाँ पेपर, प्रिंटर से लेकर ई-रिक्शा और मोटर पंप तक सब कुछ मिलता है। ग्रामीणों के अनुसार यहाँ की 4 घटिया डस्टबिन टूट चुकी हैं।कोई कचरा उठाने वाली गाड़ी नहीं है बल्कि गाड़ी की जगह पर साइकिल रिक्शा खरीदा गया है।
कुलवहरिया: यहाँ के सरपंच ने स्वीकार किया कि डस्टबिन का पैसा जमा हो चुका है पर डस्टबिन आज तक नहीं आया। वही मौके पर मौजूद जो कचरा गाड़ी खरीदी गई है वो छोटी गाड़ी है जो (300 किलो क्षमता वाली है , उसकी बाजार कीमत मात्र ₹1.40 लाख से ₹1.60 लाख तक बताई जा रही है।
रजिगमा और उचेहरा: यहाँ सड़क किनारे इक्का-दुक्का ऐसी डस्टबिन लगी मिलीं जिनका बाजार मूल्य मात्र ₹1,500 से ₹2,000 है, लेकिन कागजों में इन्हें ₹15,000 से ₹30,000 तक की कीमत में दर्शाया गया है।

बाजार मूल्य बनाम कागजी लूट का गणित
जब न्यूज़ 24 MP-CG और लल्लूराम डॉट कॉम की टीम ने अधिकृत एजेंसियों से कोटेशन की पड़ताल की, तो एक बड़ा सच सामने आया। बाजार में बेहतरीन क्वालिटी का लंबी बैटरी बैकअप वाला ई-रिक्शा (जो 120-150 किमी चले और 700 किलो वजन उठाए) महज ₹1,90,000 से ₹2,20,000 में मिल जाता है। इसके बावजूद कुलबहेरिया पंचायतो ने इन्हें दोगुने दामों पर खरीदा। इसी तरह ₹1,500 से ₹2,000 की सामान्य डस्टबिन को कागजों में 15000 से ₹30,000 तक का बताकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया।
जब इस व्यापक भ्रष्टाचार और फर्जी बिल-वाउचर के मामलों को जब मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जनपद पंचायत मऊगंज के सामने रखा गया, तो उन्होंने कैमरे पर कहा:मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। आज आपके द्वारा यह मामला मेरे संज्ञान में लाया गया है। हम इसकी पूरी जाँच करवाएंगे और तथ्यों के आधार पर कड़े वैधानिक कदम उठाएंगे।
जहाँ एक ओर गाँवों में आज भी पक्की सड़कें नहीं हैं, वहीं स्वच्छता के नाम पर फर्जी फर्मों और सीमेंट-इलेक्ट्रॉनिक दुकानों से फर्जी बिलों पर लाखों-करोड़ों रुपए ठिकाने लगा दिए गए हैं। न्यूज़ 24 MP-CG और लल्लूराम डॉट कॉम के इस बड़े खुलासे के बाद अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर क्या सख्त कार्रवाई करता है।
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