सोनीपत। जिले के मेयर चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के भीतर जबरदस्त सियासी भूचाल आ गया है। पार्टी के आधिकारिक मेयर प्रत्याशी कमल दीवान ने चुनाव लड़ने से साफ इनकार कर दिया है जिससे पूरी कांग्रेस हाईकमान के हाथ-पांव फूल गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि महज एक दिन पहले ही उन्होंने दीपेंद्र हुड्डा और अन्य दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में गाजे-बाजे के साथ नामांकन दाखिल किया था। लेकिन पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी और पार्षद टिकटों को लेकर मचे घमासान ने उन्हें यह आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है।
पुरानी हार का जख्म और भीतरघात का डर
दरअसल कमल दीवान पिछले मेयर उपचुनाव में मिली करीब 35 हजार वोटों की करारी हार को अब तक नहीं भूल पाए हैं। उस वक्त उन्होंने खुलेआम आरोप लगाया था कि पार्टी के ही कुछ पार्षदों ने उनके पीठ में छुरा घोंपा था। मैदानी सूत्रों का कहना है कि कमल दीवान इस बात से बेहद नाराज हैं कि इस बार भी उन्हीं चेहरों को पार्षद का टिकट दिया जा रहा है जिन्होंने पिछली बार उनके खिलाफ काम किया था। उन्हें डर है कि अगर फिर से वही लोग मैदान में रहे तो उनकी हार की कहानी दोबारा दोहराई जा सकती है।
फोन बंद कर अंबाला रवाना हुए दीवान और हाईकमान की टेंशन
विवाद इतना बढ़ गया है कि कमल दीवान ने अपने सभी फोन बंद कर लिए हैं और किसी भी नेता के संपर्क में नहीं हैं। जानकारी के मुताबिक वह फिलहाल अपने परिवार के साथ चर्चा कर रहे हैं और उन्हें बातचीत के लिए अंबाला बुलाया गया है। अंबाला में होने वाली इस बैठक को निर्णायक माना जा रहा है क्योंकि अगर दीवान नहीं माने तो कांग्रेस के पास वैकल्पिक उम्मीदवार ढूंढने का समय बहुत कम बचेगा। पूर्व विधायक सुरेंद्र पवार के करीबियों को टिकट देने का मुद्दा भी इस पूरे ड्रामे की एक मुख्य कड़ी बना हुआ है।

