बारीपदा: ओडिशा के मयूरभंज जिले में सिमिलिपाल अभयारण्य से सटे खापरखाई गांव से गुरुवार रात एक सात से आठ महीने के बाघ के शावक को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, चिकित्सीय देखभाल और पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद शावक को सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में स्थित जमुना में एक बड़े बाड़े में स्थानांतरित किया जाएगा।
सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व (STR) अधिकारियों द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, करंजिया फॉरेस्ट डिवीजन के ठाकुरमुंडा रेंज अंतर्गत खापरखाई गांव में 24 सितंबर की रात यह शावक सबसे पहले एक ग्रामीण के मवेशी शेड (गोशाला) में दाखिल हुआ था। खापरखाई गांव सिमिलिपाल अभयारण्य की सीमा से बिल्कुल सटा हुआ है।
गोशाला से निकलने के बाद शावक शुक्रवार सुबह तक पास के ही एक खाली पड़े मकान के अंदर छुपा रहा। गांव में बाघ के बच्चे की मौजूदगी की खबर मिलते ही ग्रामीणों में हड़कंप मच गया और उन्होंने तुरंत वन विभाग को सूचना दी। शुक्रवार सुबह मौके पर पहुंचे वन अधिकारियों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने जांच में पाया कि शावक को चिकित्सीय देखभाल की जरूरत है। इसके बाद वन विभाग की टीम ने दोपहर करीब 12 बजे पिंजरे की मदद से शावक को सुरक्षित बाहर निकाला।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया शावक को वर्तमान में चिकित्सकों की देखरेख में रखा गया है और उसका आवश्यक इलाज जारी है। स्वस्थ होने और आवश्यक शारीरिक क्षमता हासिल करने के बाद, इसे सिमिलिपाल के कोर एरिया स्थित ‘जमुना’ में बने विशाल बाड़े में शिफ्ट किया जाएगा।
जब शावक बड़ा होकर खुद शिकार करने और स्वतंत्र रूप से जीवित रहने में सक्षम हो जाएगा, तब उसे प्राकृतिक जंगल में छोड़ दिया जाएगा। रिहायशी इलाके में वन्यजीवों की आवाजाही को देखते हुए वन विभाग ने आसपास के गांवों में अलर्ट जारी कर दिया है और स्थिति पर सतर्क नजर रखी जा रही है।
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