मेरठ के सरधना में सरकारी स्कूल की बदहाली का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले दो लॉ ग्रेजुएट्स को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. जमानत पर बाहर आए संयम पांचाल ने कहा कि उनका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों की स्थिति में सुधार की बात उठाना था.
मेरठ. सरधना में बेसिक शिक्षा विभाग के एक सरकारी स्कूल की बदहाली का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले दो लॉ ग्रेजुएट्स को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. विभाग का आरोप है कि युवाओं द्वारा पोस्ट किया गया वीडियो पूरी तरह भ्रामक है, जिससे आमजन में गलत संदेश गया और विभाग की छवि धूमिल करने की कोशिश की गई.
हालांकि, कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आए छात्र संयम पांचाल ने पूरी घटना पर अपनी सफाई दी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य देश की शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों की जमीनी हकीकत में सुधार की बात उठाना था.
स्कूल ठीक करो अभियान
संयम पांचाल ने बताया कि इन दिनों ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान चलाया जा रहा है. इससे प्रेरित होकर उन्होंने अपने नगर क्षेत्र के सरकारी विद्यालय का दौरा किया था.

उन्होंने 15 अगस्त को कालंद गांव के स्कूल में बड़ी-बड़ी घास, गंदगी और जर्जर टॉयलेट का वीडियो बनाया था. इसके बाद 17 अगस्त को सरधना चर्च के पास स्थित बेसिक स्कूल की अव्यवस्थाओं को उजागर किया था.
इस दौरान स्कूल में चारदीवारी नहीं होना, जलभराव और आवारा पशुओं का घूमना साफ नजर आ रहा था. संयम का आरोप है कि सच दिखाने के बाद बिना कानूनी प्रक्रिया का सही पालन किए उन्हें और उनके दोस्त अयान मिर्जा को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया.
पिता और लोगों में आक्रोश
इस कार्रवाई पर स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ा ऐतराज जताया है. स्थानीय निवासी राहुल जड़ोदिया का कहना है कि खंड शिक्षा अधिकारी का दफ्तर परिसर में होने के बावजूद स्कूल की चारदीवारी तक नहीं है और थोड़ी सी बारिश में पानी भर जाता है.

संयम के पिता जितेंद्र पांचाल ने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है कि उसने 22 साल की उम्र में और ज्यूडिशरी की तैयारी करते हुए समाज की एक वास्तविक समस्या को सामने रखा. उन्होंने अधिकारियों की इस दमनकारी कार्रवाई को अनुचित बताते हुए कहा कि सच्चाई दिखाने पर ऐसी सजा मिलना देश के भविष्य के लिए बेहद चिंताजनक है.
विभाग ने दी सफाई
मामले पर खंड शिक्षा अधिकारी सुदर्शन लाल ने माना कि स्कूल में कायाकल्प योजना के तहत अभी काम होना बाकी है और बारिश में पानी भरने की समस्या भी बनी रहती है. उन्होंने कहा कि जर्जर भवनों को गिराने और चारदीवारी निर्माण के लिए बजट का इंतजार किया जा रहा है और जल्द ही स्थिति में सुधार होगा.
दूसरी ओर, लॉ ग्रेजुएट संयम पांचाल ने कहा कि उन्होंने अपने मौलिक अधिकारों के तहत जनता के टैक्स के पैसे से चलने वाले स्कूलों की बात रखी थी. उन्होंने कहा कि वे इस अन्यायपूर्ण मुकदमे को खत्म कराने के लिए जरूरत पड़ने पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी जंग लड़ेंगे.


