Dharm Desk : ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, व्यापार, गणना और निर्णय लेने की क्षमता का मुख्य कारक है। जब भी बुध की चाल में बदलाव होता है, तो इसका सीधा प्रभाव हमारे कारोबार, नौकरी, आर्थिक फैसलों और आपसी रिश्तों पर पड़ने की मान्यता है। अक्टूबर में बुध एक बार फिर वक्री होने जा रहे हैं, जिसके चलते ज्योतिषीय गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। वैदिक ज्योतिष की गणना के अनुसार, 24 अक्टूबर को बुध तुला राशि में वक्री होंगे और 13 नवंबर तक इसी अवस्था में रहकर लगभग 20 दिनों तक उलटी चाल चलेंगे।
तुला राशि को संतुलन, साझेदारी और आपसी संबंधों का प्रतीक माना है, जबकि बुध तर्क, व्यापार और संवाद के कारक है। ऐसे में इस अवधि को जीवन के पुराने फैसलों पर विचार करने और रुके हुए कामों की समीक्षा करने का बेहतरीन अवसर माना जा रहा है। वक्री गति का अर्थ खगोलीय रूप से ग्रह का पीछे लौटना नहीं, बल्कि पृथ्वी और उस ग्रह की आपसी गति के कारण पड़ने वाला एक दृश्य प्रभाव है। हालांकि, ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इस दौरान बातचीत में गलतफहमी, कामकाज में देरी, दस्तावेजों में त्रुटि या योजनाओं में बदलाव की आशंका अधिक रहती है।
मेष राशि
बुधदेव आपके सप्तम भाव में वक्री होंगे। इससे विवाह, व्यापार की साझेदारियों और व्यावसायिक समझौतों पर ध्यान बढ़ेगा। किसी साथी के साथ पुरानी चर्चा फिर से शुरू हो सकती है। जिससे किसी अधूरे मामले को सुलझाने का अवसर मिलेगा। मतभेदों पर तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचे। व्यापारिक सौदे में दोनों पक्षों को अपनी जिम्मेदारियां स्पष्ट समझनी चाहिए।

वृषभ राशि
बुधदेव आपके छठे भाव में वक्री होंगे । इससे काम-काज, स्पर्धा, उधारी और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों पर ध्यान जाएगा। आपको ऑफिस में किसी पुराने रुके काम को पूरा करने या पहले हुई गलती को सुधारने का मौका मिल सकता है। अपने बजट और पैसे चुकाने की योजनाओं को दोबारा जांचे। पैसे उधार लेने से पहले चुकाने की सही रणनीति बनाएं।
कन्या राशि
बुधदेव आपकी राशि के स्वामी हैं और आपके द्वितीय भाव में वक्री होने वाले हैं। इससे धन, बचत, बात-चीत और पारिवारिक मामलों पर असर पड़ेगा। आपको अपनी आय, खर्चों और लंबी अवधि की आर्थिक प्राथमिकताओं की समीक्षा करने की आवश्यकता महसूस होगी। किसी पुराने भुगतान या लेन-देन पर स्पष्टता की जरूरत होगी।

