शब्बीर अहमद, भोपाल। लाड़ली बहना योजना से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। लाड़ली बहना योजना में नए नाम जोड़े जाएंगे। राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने यह बात कही है। उन्होंने कहा कि नाम जोड़ने के लिए फिर से पोर्टल खुलेंगे। मंत्री ने बताया कि सीएम डॉ मोहन ने घोषित किया है कि निकट भविष्य में लाडली बहना योजना से बची महिलाओं के नाम जोड़े जाएंगे। मुख्यमंत्री ने योजना से छूटे हुए नामो का आंकलन करने के निर्देश दिए है।

स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना में नाम जुड़ने के लिए फिर पोर्टल खुलेंगे। सीएम डॉ मोहन यादव ने घोषित किया है निकट भविष्य में इस योजना से बची महिलाओं के नाम जोड़े जाएंगे। मुख्यमंत्री ने योजना से छूटे हुए नामों का आंकलन करने के निर्देश दिए है। कितनी महिलाएं बची हुई है, उनके आंकलन करने के आंतरिक निर्देश सीएम ने दिए है।

लाड़ली बहना योजना का पूरा इतिहास

अगस्त 2026 में मध्य प्रदेश कैबिनेट ने लाडली बहना योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी थी। जिसमें 5 वर्षों के लिए करीब 1,43,650 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। जो सालाना औसतन करीब 22,873 करोड़ रुपये है। इस योजना के तहत राज्य की 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये की राशि ट्रांसफर की जाती है।

2023 के विधानसभा चुनाव से पहले तात्कालिक सीएम और मौजूदा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने योजना शुरू की थी। शिवराज सिंह चौहान ने 28 जनवरी 2023 को ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ लागू किए जाने की घोषणा की गई थी। 5 मार्च शिवराज ने अपने जन्मदिन पर अपने हाथ से योजना के लिए फार्म भरवाए थे, जिसके बाद 25 मार्च 2023 से आवेदन भरना शुरू हुए। 20 अप्रैल 2023 तक आवेदन भरे गए। मई में आवेदनों की जांच कर 10 जून 2023 को महिलाओं के खातों में पहली किस्त भेजी गई।

योजना शुरू हुई तब 1 करोड़ 31 लाख 35 हजार 985 आवेदन आए थे। इसके बाद 2 लाख 18 हजार 858 नाम आपत्तियों को आधार बनाकर काटे गए थे। जिसके बाद यह संख्या 1 करोड़ 29 लाख 5 हजार 457 रह गई थी। बीते 3 साल में 5 लाख 70 हजार से अधिक महिलाओं के नाम बाहर हो गए हैं। अब इस योजना में पात्र महिलाओं की संख्या 1 करोड़ 25 लाख 31 हजार ही रह गई है।

किन महिलाओं को मिलता है योजना का लाभ

  • मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी महिलाओं को पात्रता के दायरे में रखा गया है।
  • इसमें विवाहित महिलाओं के साथ विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाएं भी शामिल हैं।
  • आयु संबंधी प्रावधान के अनुसार, आवेदन के कैलेंडर वर्ष की 1 जनवरी को महिला की आयु 21 वर्ष पूर्ण होनी चाहिए
  • और 60 वर्ष से कम होनी चाहिए।
  • योजना का लाभ निर्धारित पात्रता एवं लागू नियमों के अनुसार दिया जाता है।
  • परित्यक्ता महिलाओं को भी इसमें शामिल किया गया है।

जून 2023 से लगातार मिल रहा लाभ

10 जून 2023 को पहली किस्त 1 हजार रुपए महिलाओं के खाते में ट्रांसफर की गई। चौथे महीने में ही यानि 10 सितंबर 2023 को राशि 1 हजार से बढाकर 1250 कर दी गई। 12 नवंबर 2025 को राशि 1500 रुपए कर दी गई। योजना की शुरुआत जून 2023 में 1.25 करोड़ महिलाओं के साथ हुई थी, अक्टूबर 2026 तक 41 किश्तें नियमित रूप से दी जा चुकी हैं। अगस्त 2023, 2024, 2025 और 2026 में 250-250 रुपये की विशेष सहायता भी चार बार दी गई। सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना में 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट रखा है।

योजना का उद्देश्य

गौरतलब है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना, उनके स्वास्थ्य व पोषण स्तर में निरंतर सुधार करना और परिवार के निर्णयों में उनकी भूमिका को सशक्त करने के उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत की गई। इसके माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे अपनी जरूरतों को पूरा के साथ ही परिवार की आर्थिक गतिविधियों में भी भागीदारी निभा सकें।

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