Odisha Desk, भुवनेश्वर: ओडिशा के मनोनीत राज्यपाल ब्रज मोहन राम द्वारा पदभार ग्रहण करने से पहले दिए गए एक विवादित बयान को लेकर राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस पर सफाई देते हुए ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने शुक्रवार को उनका बचाव किया। हरिचंदन ने कहा कि कई दशकों तक एक ही राजनीतिक दल से जुड़े रहने के कारण यह वरिष्ठ नेता की “जुबान फिसलना” हो सकता है और विपक्ष को उनके निष्पक्ष आचरण का आकलन पदभार संभालने के बाद ही करना चाहिए।

कानून मंत्री ने संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा, “यह केवल जुबान का फिसलना हो सकता है। उन्होंने बिना सोचे-समझे वे शब्द कह दिए होंगे। क्योंकि उन्होंने दशकों तक पार्टी के लिए काम किया है, इसलिए ऐसे शब्द मुंह से निकल गए। उनका ऐसा कोई इरादा नहीं था।” उन्होंने विपक्ष द्वारा पद संभालने से पहले ही इस मुद्दे को उठाने पर आलोचना की।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा ओडिशा का नया राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद, झारखंड के पलामू से तीन बार के पूर्व सांसद ब्रज मोहन राम ने रांची में एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा था कि वे पदभार संभालने के बाद “ओडिशा में बीजेपी को मजबूत करने का काम करेंगे”।

इस बयान के सामने आते ही ओडिशा के प्रमुख विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बीजद ने इस टिप्पणी पर गहरा आश्चर्य और दुख व्यक्त करते हुए कहा कि राज्यपाल का पद दलीय राजनीति से ऊपर होता है और ऐसा बयान संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है। वहीं कांग्रेस ने इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उन्हें राज्यपाल पद से वापस बुलाने की मांग की।

कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा कि विपक्ष के पास राज्यपाल के आचरण और उनकी संवैधानिक निष्पक्षता का मूल्यांकन करने के लिए पर्याप्त समय होगा। “यदि वे अपने कर्तव्यों के निर्वहन में कोई कमी रखते हैं, तो विपक्ष सवाल उठा सकता है, लेकिन अभी केवल मुंह से निकले शब्दों पर विवाद खड़ा करना उचित नहीं है।”

राजनीतिक विवाद के बीच मनोनीत राज्यपाल ब्रज मोहन राम 17 अक्टूबर को ओडिशा पहुँचेंगे और 18 अक्टूबर को नवरात्रि के पावन अवसर पर पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि राज्य का विकास ही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। वे शिक्षा, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं तथा बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के समाधान के लिए संवैधानिक दायरे में रहकर काम करेंगे।

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