शब्बीर अहमद, भोपाल: मध्य प्रदेश में रेलवे परियोजनाओं के विकास और उनके क्रियान्वयन में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए मोहन सरकार ने एक अहम प्रशासनिक कदम उठाया है। राज्य में रेलवे प्रोजेक्ट्स को गति देने और उनकी नियमित मॉनिटरिंग के लिए 4 स्तर की समितियों का गठन किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है।

क्या है समितियों का स्वरूप और कार्यप्रणाली?

यह बहु-स्तरीय निगरानी ढांचा अलग-अलग प्रशासनिक स्तरों पर काम करेगा ताकि भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति और यूटिलिटी शिफ्टिंग जैसी अड़चनों का समय पर निराकरण हो सके। राज्य स्तरीय समिति: मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल की अध्यक्षता में गठित यह सर्वोच्च समिति हर 6 महीने में समीक्षा बैठक करेगी और आवश्यकता पड़ने पर विशेष बैठकें भी आयोजित करेगी।

संभाग स्तर: संभाग स्तर पर हर दो महीने में नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी।

जिला स्तर: जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में हर महीने नियमित समीक्षा बैठक होगी, जिसमें स्थानीय स्तर पर आ रही बाधाओं को दूर किया जाएगा।

प्रमुख सचिव स्तर: प्रमुख सचिव स्तर पर हर तीन महीने में प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

कौन-कौन होंगे शामिल?
इन समितियों में रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ मध्य प्रदेश सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी और कई संबंधित जिलों के कलेक्टरों को सदस्य बनाया गया है, ताकि समन्वय में कोई कमी न रहे।

किन प्रोजेक्ट्स को मिलेगी गति?
इस व्यवस्था के लागू होने से प्रदेश में चल रही कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को रफ्तार मिलेगी। नई रेल लाइन बिछाने के कार्य, गेज कन्वर्जन (आमान परिवर्तन) प्रोजेक्ट्स, मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं।

रेलवे ओवरब्रिज और अंडरब्रिज के निर्माण कार्य

सरकार के इस कदम से लंबे समय से अटके पड़े रेलवे प्रोजेक्ट्स में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे आम जनता को जल्द ही बेहतर और सुगम रेल सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।

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