आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत बस्तर संभाग के नगरीय निकाय क्षेत्रों में संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) की कार्य प्रणाली को लेकर लल्लूराम.com के द्वारा खबर दिखाए जाने के बाद अब इस पर विपक्ष के नेताओं का भी बयान सामने आया है। गुरुवार को जगदलपुर पहुंचे पूर्व मंत्री मोहन मरकाम ने भी आरोप लगाया है कि सरकार बदलने के बाद बसों का रंग और तस्वीरें तो बदल गईं, लेकिन डॉक्टरों की कमी और संसाधनों का अभाव लगातार बना हुआ है।

मोहन मरकाम ने आरोप लगाते हुए कहा कि साल 2020 में भूपेश सरकार ने इस योजना की शुरुआत की थी जिसके तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को इस यूनिट के माध्यम से निशुल्क स्वास्थ्य सुविधा मिल सके, लेकिन पिछले कुछ सालों से लगातार राज्य के अलग-अलग जिलों से शिकायत मिल रही है कि मोबाइल मेडिकल यूनिट में संसाधनों की भारी कमी है। साथ ही दवाओं की भी कमी बनी हुई है, जिस वजह से मरीज को सही उपचार नहीं मिल पा रहा है।

वहीं उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ में सरकार बदलने के बाद वर्तमान सरकार ने मोबाइल मेडिकल निकल यूनिट के बसों का कलर तो जरूर बदल दिया उसमें मोदी जी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की तस्वीर लगा दी, लेकिन डॉक्टरों की कमी और संसाधनों का अभाव लगातार बना हुआ है।

वही सीबीसी मशीन खराब होने की जानकारी मिली है। कांग्रेस के शासनकाल में इस योजना के तहत मोबाइल मेडिकल यूनिट में 42 प्रकार के पैथोलॉजी टेस्ट की सुविधा थी, लेकिन अब जानकारी मिल रही है कि बहुत से जगहों पर पूरी जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही है। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि संबंधित कंपनी पर कार्रवाई करें।

उन्होंने कहा कि जानकारी यह भी मिली है कि सरकार इस कंपनी को हर महीने पूरा भुगतान कर रही है, लेकिन जिन-जिन जगहों पर शिकायत मिल रही है वहां किसी तरह का कोई निरीक्षण नहीं किया जा रहा, जिससे सरकारी तंत्र के कार्य प्रणाली पर भी सवाल उठना लाजिमी है।

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