सोहराब आलम, मोतिहारी। पूर्वी चंपारण जिले में साइबर थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 85 लाख रुपये की राशि की साइबर ठगी का खुलासा किया है। इस मामले में पुलिस ने एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार करने में भी बड़ी सफलता हासिल की है। यह पूरा मामला तकनीक के गलत इस्तेमाल और संगठित अपराध का एक बड़ा उदाहरण है, जिसने पुलिस प्रशासन को भी चौंका कर रख दिया है।
आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी
पुलिस द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी की पहचान रामबाबू कुमार उर्फ राम बाबू कुमार साह के रूप में हुई है। यह आरोपी दरमियाघाट थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले धनगढ़हा टोला का रहने वाला बताया जा रहा है। पुलिस को गुप्त सूचना और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर इसकी गतिविधियों पर लंबे समय से शक था। पुख्ता सबूत हाथ लगने के बाद पुलिस ने इसके ठिकानों पर छापेमारी की और इसे धर दबोचा।

छापेमारी में बरामद हुए सामान
पुलिस टीम ने जब आरोपी रामबाबू कुमार के घर पर औचक छापेमारी की, तो वहां से भारी मात्रा में संदिग्ध और अवैध सामान बरामद हुआ। पुलिस ने मौके से दो स्मार्टफोन, एक स्वाइप मशीन, 14 अलग-अलग बैंकों के एटीएम कार्ड, 14 चेकबुक और 11 पासबुक जब्त किए हैं। इसके अलावा, पुलिस को घटनास्थल से 11 ड्राइविंग लाइसेंस, पहचान पत्र और पैन कार्ड समेत कई अन्य अत्यधिक संदिग्ध सामग्रियां भी हाथ लगी हैं। इतनी बड़ी संख्या में दस्तावेज मिलने से यह साफ जाहिर होता है कि यह शातिर किसी बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहा था।
85 लाख रुपये के अवैध लेनदेन का खुलासा
जांच-पड़ताल के दौरान पुलिस के सामने यह चौंकाने वाला तथ्य आया कि आरोपी के बैंक खातों में साइबर ठगी के जरिए लगभग 85 लाख रुपये का भारी लेनदेन हुआ था। तकनीकी जांच और पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि यह आरोपी अकेला इस खेल में शामिल नहीं था। इसके अन्य कई सहयोगी भी थे, जिनके साथ मिलकर यह अलग-अलग राज्यों में लोगों को अपने जाल में फंसाता था और साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम देता था।
पुलिस की अगली कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया
इस गंभीर मामले को लेकर मोतिहारी साइबर थाना में दर्ज कर ली गई है और आगे की कानूनी कार्रवाई तेजी से की जा रही है। मोतिहारी पुलिस अब इस साइबर गिरोह के बाकी बचे अन्य सदस्यों की पहचान करने और उनकी संलिप्तता की गहराई से जांच करने में जुटी हुई है। पुलिस का यह मानना है कि इस नेटवर्क की जड़ें कई अन्य राज्यों तक फैली हो सकती हैं, और जल्द ही इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है।

