सोहराब आलम, मोतिहारी। जिले के कोटवा थाना क्षेत्र अंतर्गत गायघाट हाईस्कूल के पास आइसक्रीम खाने से छह मासूम छात्र अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। आइसक्रीम खाने के तुरंत बाद ही बच्चों के स्वास्थ्य में भयानक गिरावट दर्ज की गई।
​प्रभावित छात्रों में उज्जैनलोहियार गांव का रहने वाला सुमित कुमार भी शामिल है। आपबीती साझा करते हुए सुमित ने बताया कि स्कूल के गेट पर ‘बेस्ट चॉइस’ नाम की आइसक्रीम बेचने वाला एक विक्रेता आया था। बच्चों ने उससे आइसक्रीम खरीदकर खाई। लेकिन जैसे ही बच्चों ने आइसक्रीम का सेवन किया, उनके मुंह के अंदर असहनीय जलन शुरू हो गई। स्थिति इतनी डरावनी हो गई कि उनके होंठ आपस में चिपक गए और मुंह से खून तक निकलने लगा। बच्चों की यह हालत देखकर मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

​परिजनों की कार्रवाई और पुलिस का हस्तक्षेप

​अचानक हुई इस घटना से बच्चों के परिवार वाले और स्थानीय ग्रामीण बेहद डर गए। बिना देर किए परिजनों ने सभी बीमार छात्रों को तुरंत इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज शुरू हुआ। गनीमत यह रही कि समय पर अस्पताल पहुंच जाने के कारण सभी बच्चों की जान खतरे से बाहर है।
​बच्चों की ऐसी हालत देखकर आक्रोशित ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आइसक्रीम विक्रेता को हिरासत में ले लिया और उसे थाने ले गई। फिलहाल पुलिस उससे कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह आइसक्रीम कहां से लेकर आया था और उसमें किस प्रकार के पदार्थों का इस्तेमाल किया गया था।

​ग्रामीणों की आशंका और प्रशासनिक जांच

​घटना के बाद से इलाके के लोगों में भारी गुस्सा और डर का माहौल है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि इस आइसक्रीम में किसी खतरनाक या जहरीले केमिकल का इस्तेमाल किया गया होगा, जिसकी वजह से बच्चों की यह दयनीय स्थिति हुई। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग से मांग की है कि इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जाए और ऐसे मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
​इस मामले पर जानकारी देते हुए अपर थानाध्यक्ष अविनाश कुमार ने बताया कि पुलिस हर एंगल से इस घटना की बारीकी से जांच कर रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि वैज्ञानिक जांच और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही बच्चों के अचानक बीमार होने की असली और पुख्ता वजह सामने आ सकेगी। पुलिस का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी विक्रेता पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।