दिल्ली में ब्रिटेन से आयात होने वाली शराब की कीमतों में कमी का रास्ता साफ हो सकता है। दिल्ली आबकारी विभाग (Delhi Excise Department) ने शराब लाइसेंस धारकों को भारत-यूके कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) के तहत आने वाले इम्पोर्टेड शराब ब्रांडों की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) तय करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने लाइसेंस धारकों से MRP में संशोधन के लिए आवेदन मांगे हैं। आबकारी विभाग ने यह कदम ब्रिटेन से आयात होने वाली शराब पर लागू कस्टम ड्यूटी में कटौती के बाद उठाया है। ड्यूटी कम होने से आयात लागत में कमी आने की संभावना है, जिसके आधार पर संबंधित ब्रांडों की एमआरपी में संशोधन किया जा सकता है।आबकारी विभाग से एमआरपी संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ब्रिटेन से आने वाली कुछ इम्पोर्टेड शराब (Imported Liquor) की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है।

आधी हुई कस्टम ड्यूटी

दिल्ली आबकारी विभाग ने सितंबर में जारी एक आदेश में बताया था कि 15 जुलाई से लागू भारत-यूके व्यापार समझौते के तहत ब्रिटेन से आयात होने वाली शराब पर कस्टम ड्यूटी में कटौती की गई है। पहले इस पर 150 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लगती थी, जिसे घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है। नई व्यवस्था में 25 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी और 50 प्रतिशत एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) शामिल है। कस्टम ड्यूटी में इस कमी के बाद अब आयातित शराब के ब्रांडों की एमआरपी में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

यह कदम क्यों उठाया गया?

भारत-यूके कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) के तहत इस साल 15 जुलाई से ब्रिटेन से आयात होने वाली व्हिस्की और जिन पर कस्टम ड्यूटी 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत कर दी गई है। कस्टम ड्यूटी में इस कटौती के बाद दिल्ली आबकारी विभाग ने प्रभावित ब्रांडों की एमआरपी में भी उसी के अनुरूप संशोधन करने के निर्देश दिए हैं। विभाग के मुताबिक कस्टम ड्यूटी उस फॉर्मूले का अहम हिस्सा है, जिसके आधार पर वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एल-1एफ लाइसेंस की शर्तों के तहत इम्पोर्टेड शराब की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) तय की जाती है। ऐसे में ड्यूटी कम होने के बाद संबंधित ब्रांडों की एमआरपी को भी संशोधित करना जरूरी हो गया है।

क्या हैं इस फैसले के मायने?

आबकारी विभाग के इस फैसले के बाद दिल्ली में बिकने वाली ब्रिटेन, खासकर स्कॉटलैंड से आयातित व्हिस्की के दाम कम होने की संभावना है। हालांकि, कीमतों में तत्काल बदलाव नहीं होगा। संबंधित लाइसेंसधारकों को संशोधित एमआरपी के लिए आवेदन करना होगा और आबकारी विभाग की मंजूरी मिलने के बाद ही नई कीमतें लागू की जा सकेंगी। कस्टम ड्यूटी में कटौती के अनुपात में एमआरपी में संशोधन होने पर उपभोक्ताओं को इम्पोर्टेड शराब पहले की तुलना में कम कीमत पर मिल सकती है।

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