राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्य प्रदेश में जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (JIIC) के लिए विशेष प्रयोजन कंपनी (SPV) जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड का गठन किया गया है। यह कंपनी पूरी तरह राज्य सरकार के स्वामित्व में होगी। शासन इसके लिए 100 करोड़ की प्रारंभिक राशि भी देगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज कैबिनेट बैठक हुई जिसमें कई अहम प्रस्तावों को अंतिम मुहर लगी।
एक्सप्रेस वे लगभग 117.7 किलोमीटर लंबा होगा जिसकी अनुमानित लागत लगभग 7,145.14 करोड़ रुपए होगी। निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा BOT (टोल) मॉडल पर किया जाएगा। 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे के रूप में बनाया जा रहा है। भविष्य में इसे 6-लेन तक बढ़ाया जा सकेगा। इस मार्ग के बनने से कानपुर और कबरई के बीच का सफर जो पहले करीब 3.5 घंटे का था, वह घटकर डेढ़ घंटे का रह जाएगा। यह प्रोजेक्ट NH-34, NH-35, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और कानपुर रिंग रोड से जुड़ेगा।
सांदीपनि स्कूलों में बसों के परिवहन की दरें तय करने के लिए कुछ जिलों के कलेक्टरों को अधिकार दिए गए हैं। इसके लिए 240 करोड़ रु की राशि मंजूरी की गई है। जनजाति क्षेत्रों में सांदीपनि स्कूलों के लिए बस सेवा होगी। नए जिलों में महिला एवं बाल विकास के नए कार्यालय खोलने को भी मंजूरी मिली है।साथ ही जल संसाधन विभाग की कई सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता को मंजूरी और आयुष विभाग में 1691 करोड़ की योजना की निरंतरता को मंजूरी दी गई। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग की योजनाओं की निरंतरता के लिए 3 हजार करोड़ रुपए की राशि को मंजूरी मिली है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कॉरिडोर पूरे महाकौशल क्षेत्र को नई औद्योगिक ताकत प्रदान करेगा। जबलपुर से शुरू होकर भोपाल होते हुए प्रदेश की व्यापारिक राजधानी इंदौर तक विस्तारित होने वाला यह कॉरिडोर औद्योगिक विकास और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति देगा।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के क्रियान्वयन के लिए उद्योग विभाग के माध्यम से एक नई कंपनी का गठन किया गया है। यह कंपनी एक इकोनॉमिक कॉरिडोर के रूप में कार्य करेगी और पूरी तरह राज्य शासन के स्वामित्व में होगी। राज्य शासन की ओर से इसके लिए 100 करोड़ की राशि उपलब्ध कराई गई है। इसकी गवर्निंग काउंसिल की अध्यक्षता मैं स्वयं करूंगा, ताकि निर्णय तेजी से लिए जा सकें और सभी संबंधित विभाग समन्वय के साथ काम कर सकें। हमारी अन्य कंपनियों के संचालन से प्राप्त अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ भी इस परियोजना को मिलेगा, जिससे विकास कार्यों को तेज गति से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
जबलपुर, नरसिंहपुर से लेकर रायसेन तक का क्षेत्र औद्योगिक विकास की व्यापक संभावनाओं से परिपूर्ण है। यहां पर्यटन, खनन, कृषि और भारी उद्योगों के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं। इसके साथ ही सड़क, बिजली, पानी और विमानन सहित आवश्यक कनेक्टिविटी की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। ये सभी सुविधाएं किसी भी उद्योग की स्थापना और संचालन के लिए बुनियादी जरूरतें हैं। इस कॉरिडोर के विकास से निवेश करने वाले उद्योगों को इन सुविधाओं का लाभ मिलेगा और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होगा।
यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र को औद्योगिक एवं आर्थिक रूप से विकसित करने की एक व्यापक योजना है। इसके प्रथम चरण में 3,000 से लेकर 10,000 एकड़ तक भूमि विकसित करने की योजना है।
निवेश और रोजगार की दृष्टि से भी यह कॉरिडोर महत्वपूर्ण साबित होगा। मार्च 2028 तक एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का अनुमान है। इससे लगभग एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और दो लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है। इस प्रकार कुल तीन लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं।
आगामी तीन वर्षों की अवधि में तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश और छह लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने की संभावना है। यह कॉरिडोर महाकौशल सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक विकास, निवेश संवर्धन और रोजगार सृजन का नया मार्ग प्रशस्त करेगा।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने आगे बताया कि स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में हमने एक बड़ा निर्णय लिया है। मध्यप्रदेश में सांदीपनि स्कूलों की स्थापना के साथ-साथ शासकीय स्कूलों, छात्रावासों, पुस्तकालयों, आवासीय विद्यालयों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों के विकास के लिए लगभग 3,000 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है।
इस राशि के माध्यम से विधायक, सांसद सहित अन्य मदों के संसाधनों को जोड़कर शैक्षणिक संस्थानों का कायाकल्प किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।
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