शब्बीर अहमद, Bhopal/इंदर कुमार, Jabalpur.  मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग और शिक्षक जगत से दो बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण हलचल सामने आई है। एक तरफ जहां जबलपुर हाई कोर्ट ने प्रदेश के हजारों अतिथि विद्वानों के हक में एक ऐतिहासिक और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। दूसरी तरफ राजधानी भोपाल में ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता और वेतन कटौती के तुगलकी फरमान को लेकर सरकार और शिक्षक संघों के बीच आर-पार की जंग छिड़ गई है। आइए जानते हैं शिक्षा जगत की इन दोनों बड़ी खबरों की पूरी डिटेल।

हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 4700 गेस्ट फैकेल्टी की नौकरी अब सुरक्षित

प्रदेश के करीब 4 हजार 700 गेस्ट फैकेल्टी को जबलपुर हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अब तक चली आ रही व्यवस्था के तहत जैसे ही किसी कॉलेज या स्कूल में नियमित शिक्षक की नियुक्ति होती थी, वहां पहले से पढ़ा रहे गेस्ट फैकेल्टी की तुरंत छुट्टी कर दी जाती थी। लेकिन हाई कोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा आदेश दिया है।

नहीं की जाएगी छुट्टी, दूसरी जगह करना होगा शिफ्ट

अदालत ने साफ कर दिया है कि नियमित शिक्षक के आने पर भी गेस्ट फैकेल्टी को पद से नहीं हटाया जाएगा। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यदि संबंधित संस्थान में जगह नहीं है, तो उस गेस्ट फैकेल्टी को किसी दूसरी जगह में शिफ्ट किया जाए, न कि नौकरी से निकाला जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि गेस्ट फैकेल्टी की खुद की मर्जी या सहमति होने पर ही सरकार उनकी सेवा समाप्त कर सकती है।

एक याचिका ने बदली तस्वीर

बता दें कि यह ऐतिहासिक फैसला एक महिला गेस्ट फैकेल्टी द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सुनाया है, जिससे हजारों परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो गया है।

E-Attendance पर बढ़ा बवाल! शिक्षक संघ ने खोला मोर्चा, मंत्री बोले- ‘समझौता नहीं’

दूसरी तरफ शिक्षा विभाग में 1 जुलाई से लागू किए गए ‘ई-अटेंडेंस न लगाने पर वेतन कटौती और निलंबन’ के आदेश ने पूरे प्रदेश में बवाल खड़ा कर दिया है। मध्य प्रदेश शिक्षक संघ ने इस आदेश के खिलाफ सीधे स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह से मुलाकात कर अपना तीखा विरोध दर्ज कराया है।

वेतन कटौती और सस्पेंशन का खौफ

सरकार के नए आदेश के मुताबिक जो शिक्षक ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज नहीं करेंगे, उनका वेतन काटा जाएगा और उन पर सस्पेंशन की गाज भी गिर सकती है। शिक्षक संघ ने इस आदेश को तुरंत निरस्त करने की मांग की है।

95% सफलता के बाद भी सख्ती क्यों?

शिक्षक संघ का तर्क है कि शिक्षा विभाग खुद मान चुका है कि पूरे प्रदेश में 90 फीसदी से ज्यादा ई-अटेंडेंस सफलतापूर्वक लग रही है। अधिकांश जिलों में तो यह आंकड़ा 94 से 95 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

संघ का कहना है कि दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क गायब रहना, इंटरनेट न चलना, बिजली गुल होना, मोबाइल खराब होना या ऐप में तकनीकी ग्लिच आना आम बात है। इन समस्याओं के कारण अगर उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती, तो उसके लिए शिक्षकों को दोषी ठहराकर उनका वेतन काटना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।

शिक्षा मंत्री का कड़ा रुख

हालांकि इस पूरे विरोध के बीच स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि व्यवस्था को सुधारने के लिए ई-अटेंडेंस लागू की गई है और इससे किसी भी कीमत पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

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