अभय मिश्रा, मऊगंज। Exclusive: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में केंद्र और राज्य सरकार की सबसे महत्वकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन’ भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी है। जिले में हर घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने के नाम पर 200 करोड़ रुपये से अधिक का बजट पानी की तरह बहा दिया गया, लेकिन 6 साल बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों के लिए नल का पानी एक सपना बना हुआ है। मऊगंज, नईगढ़ी और हनुमना विकासखंड के 30 से अधिक गांवों में जब जमीनी हकीकत खंगाली, तो सरकारी दावों की ऐसी पोल खुली जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

टोंटी गायब, शराब की बोतलों से रोका पानी

पड़ताल में सबसे हैरान और विचलित करने वाली तस्वीरें सामने आईं। ठेकेदारों ने सड़कों के किनारे पाइपलाइन तो बिछा दी, लेकिन घरों के अंदर न तो सही कनेक्शन दिए गए और न ही नलों में टोंटियां लगाई गईं। कई गावों में पानी आज तक नहीं आया लेकिन जिन गावों में जब कभी पाइपलाइन में पानी की सप्लाई आती है, तो टोंटी न होने के कारण पानी सड़कों पर बहकर बर्बाद होने लगता है। इस बर्बादी को रोकने के लिए ग्रामीणों ने मजबूरन नलों के मुहाने पर देसी मदिरा की खाली बोतलें लगा रखी हैं। ग्रामीणों का दर्द साफ है कि जब सरकार और ठेकेदार नल में टोंटी तक नहीं लगा सके, तो पानी रोकने के लिए उन्हें शराब की बोतलों का सहारा लेना पड़ रहा है।

कागजों की ‘जादूगरी’: 200 करोड़ का गणित और 183 गांव अधर में

विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, जिले में जल प्रदाय योजना को दो प्रमुख भागों में बांटा गया था…

  • मैकेनिकल योजना (200 गांव): विभाग का दावा है कि 167 गांवों में पानी पहुंचाया जा चुका है और 155 गांवों को प्रमाणित किया जा चुका है, जबकि शेष में काम जारी है।
  • सिविल योजना (184 गांव): इसमें से सिर्फ 1 गांव ‘मड़ना’ का काम पूरा होना बताया गया है, जबकि बाकी 183 गांवों को ‘पुनरीक्षित योजना’ में डाल दिया गया।

सबसे बड़ा खेल: जिस योजना को वर्ष 2021 में शुरू होकर 6 से 9 महीने (बरसात सहित) में पूरा होना था, वह 6 साल बाद भी अधूरी है। हैरानी की बात यह है कि कई शिकायतों के बाद भी जिन ठेकेदारों ने तय समय में काम पूरा नहीं किया और गांवों तक पानी नहीं पहुंचाया, उन्हीं कुछ लापरवाह ठेकेदारों की सहमति से द्वितीय चरण (पुनरीक्षित योजना) के काम भी दोबारा उन्हीं को सौंप दिए गए।

EOW की FIR: टेस्टिंग के दौरान गिरी टंकी, 3.85 करोड़ का फर्जी आहरण

भ्रष्टाचार किस कदर हावी है, इसका सबसे बड़ा प्रमाण जनपद पंचायत नईगढ़ी का ग्राम खटखरी है। जहां प्रथम जल भराव (टेस्टिंग) के दौरान ही नवनिर्मित पानी की टंकी भरभरा कर ढह गई।जांच के बाद आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (EOW) ने पाया कि कार्य पूर्ण किए बिना ही ठेकेदार ने अधिकारियों के साथ साठ-गांठ कर 3 करोड़ 85 लाख रुपये की राशि का नियम विरूद्ध तरीके से आहरण कर लिया। EOW ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत इन लोगों परआपराधिक प्रकरण दर्ज किया है…

  • जनार्दन प्रसाद (जे.पी.) द्विवेदी(तत्कालीन कार्यपालन यंत्री, PHE मऊगंज)
  • संजय पांडेय (तत्कालीन सहायक यंत्री, PHE मऊगंज)
  • ए.पी. तिवारी (तत्कालीन उपयंत्री, PHE मऊगंज)
  • शिवेंद्र कुमार तिवारी (निविदाकार / ठेकेदार)।

गांव-गांव में खुली दावों की हवा

  • ग्राम करह उर्फ खैरागढ़:5 समर्सिबल मोटर पंपों की जगह केवल 1 पंप डाला गया। 740 कनेक्शनों के दावे के विपरीत किसी भी घर के अंदर नल की फिटिंग नहीं मिली।
  • ग्राम सिवराजपुर:ओवरहेड टैंक और संपवेल का निर्माण अधूरा पड़ा है।
  • जुड़मनिया रघुनाथ:मुख्य पाइपलाइन आधे गांव में ही बिछाई गई और घरों तक पानी की एक बूंद नहीं पहुंची।
  • अधिकारियों के दावों की पोल:तत्कालीन सहायक यंत्री संजय पांडेय द्वारा मऊगंज, नईगढ़ी और हनुमना के 10 गांवों (जैसे- कुलबेहरिया, ढनगन, देवरी शिवमंगल सिंह, मुदरिया चौहान, मिसिरगवां, शाहपुर, कुशहा, अटरा, डिहिया, चमड़िया) में जलापूर्ति शुरू होने का दावा किया गया था। लेकिन धरातल पर कार्य 70 प्रतिशत से ज्यादा पूरा नहीं है और पाइप सड़कों के किनारे पड़े सड़ रहे हैं।

फर्जी हस्ताक्षर-पोर्टल पर दूसरे राज्यों के वीडियो का खेल

न्यूज़ 24 और लल्लूराम डॉट काम की संयुक्त पड़ताल में फर्जीवाड़े के कई चौकाने वाले तरीके सामने आए…

  • सरपंच-सचिवों के फर्जी दस्तखत:जांच की गई 30 पंचायतों के इस्तेमाल किए गए प्रस्ताव फर्जी पाए गए। बरया कला के सरपंच-सचिव तथा गेरुआरी सेगरान (नईगढ़ी) के सचिव ने थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है कि उनके फर्जी हस्ताक्षर कर फर्जी प्रस्ताव तैयार किए गए।
  • दूसरे जिलों और राज्यों के वीडियो: जल जीवन मिशन के आधिकारिक पोर्टल पर ग्राम पंचायत अतरैला कला समेत कई गांवों का फर्जी सत्यापन दिखाने के लिए सतना जिले और बिहार के पुराने वीडियो अपलोड कर दिए गए।
  • बिना काम पूरा किए कनेक्शन का आंकड़ा बढ़ाना: काम पूरा किए बिना ही ग्रामीणों के दस्तावेज लेकर कागजों पर कनेक्शन दर्शा दिए गए। कई स्थानों पर संख्या बढ़ाने के लिए एक ही जगह 33 पाइप बाहर निकाल दिए गए, लेकिन टोंटी एक में भी नहीं लगाई गई।
  • घटिया निर्माण कार्य: पाइपों को नियमनुसार 1 मीटर गहराई में दबाने के बजाय मात्र 1 से 2 फीट में डाल दिया गया। लीकेज ट्रेसिंग के लिए अनिवार्य कॉपर वायर का इस्तेमाल नहीं हुआ।

विधानसभा में गूंजा सवाल, मंत्री का गोलमोल जवाब

क्षेत्रीय विधायक प्रदीप पटेल ने विधानसभा में प्रश्न क्रमांक 365 के जरिए मऊगंज में जल जीवन मिशन के बीओक्यू, भुगतानों और कार्यों की अद्यतन स्थिति की जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके की ओर से गोलमोल जवाब देते हुए कहा गया कि “ठेकेदार की ओर से अनुबंध की शर्तों और मानकों के अनुरूप कार्य संपादित कर मापन के बाद भुगतान किया गया है।” धरातल की सच्चाई इस जवाब के ठीक उलट है। मऊगंज में 200 करोड़ रुपये स्वाहा होने के बाद अब सरकार रीवा बाणसागर समूह (1947 करोड़) और टमस समूह (827.97 करोड़) के नाम पर नए बड़े प्रोजेक्ट ला रही है, जबकि पुरानी योजना का पानी जनता को आज तक नसीब नहीं हुआ।

अधिकारियों का रवैया: कोई जवाब नहीं, कोई फोन नहीं

जब इस पूरे मामले पर पीएचई विभाग के ईई संजय पांडेय से सिविल कार्यों की स्थिति जाननी चाही, तो उन्होंने यह कहकर टाल दिया कि “बाद में जानकारी दूंगा।” वहीं मैकेनिकल कार्यों को लेकर जब संबंधित उपयंत्री से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझा। सरकारी फाइलों में ‘हर घर जल’ का लक्ष्य भले ही पूरा दिखाया जा रहा हो, लेकिन मऊगंज की जनता आज भी नल में पानी की जगह टोंटी पर टंगी शराब की बोतलों को देखकर व्यवस्था के इस क्रूर मजाक पर आंसू बहा रही है।

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