दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। British-Era Tank: जब दुनिया आधुनिक तकनीकों के बावजूद जल संकट से जूझ रही है। तब मध्य प्रदेश के सबसे ऊंचे बिंदु धूपगढ़, जिसकी उंचाइओ 1350 मीटर पर स्थित ऐतिहासिक जल टैंक हमें ‘पुरखों की समझदारी’ का पाठ पढ़ा रहे हैं। पचमढ़ी के सहायक संचालक संजीव शर्मा के अनुसार ब्रिटिश शासनकाल (लगभग 1864) में निर्मित तीन विशाल जल टैंक आज भी उतने ही सक्रिय और उपयोगी हैं जितने डेढ़ सदी पहले थे।

​संजीव शर्मा के अनुसार ​धूपगढ़ जैसे ऊंचे और दुर्गम स्थान पर पानी को नीचे से ऊपर लिफ्ट करना आज भी एक बड़ी चुनौती और खर्चीला काम है। ऐसे में ब्रिटिश काल की यह ‘रेन वॉटर हार्वेस्टिंग’ प्रणाली आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। यहां कुल तीन टैंक हैं, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 21,000 लीटर है। इस प्रकार कुल 63,000 लीटर वर्षा जल सहेज कर रखा जाता है। पर्यटक केंद्र की छतों और ढलानों से गिरने वाले वर्षा जल को पाइपों के माध्यम से इन टैंकों तक पहुंचाया जाता है। 

यह संचित जल अगले 6 से 7 महीनों तक यहां आने वाले पर्यटकों की जरूरतों, वाशरूम और अन्य दैनिक कामों के लिए पर्याप्त होता है। उन्होंने बताया कि ​इन टैंकों की खासियत केवल इनका निर्माण नहीं, बल्कि इनका रखरखाव भी है। विभाग द्वारा हर साल इनकी बारीकी से मरम्मत की जाती है ताकि लीकेज की संभावना शून्य रहे। पत्थरों और चूने से बनी यह संरचना आज के कंक्रीट के दौर में भी अडिग खड़ी है।

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