राकेश चतुर्वेदी, भोपाल/देवास/गुना। मध्य प्रदेश में शासकीय कार्यों में घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने वाले कर्मचारियों पर प्रशासन ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है। शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली ‘स्वामित्व योजना’ के अंतर्गत अधिकार अभिलेखों के निष्पादन एवं पंजीयन कार्य में शून्य प्रगति दर्ज कराने, अपने हल्के में न रहने और असहयोग का रवैया अपनाने पर देवास जिले में 3 परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं।

देवास में 3 पटवारियों पर गिरी गाज

देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने सोनकच्छ तहसील के घिचलाय में पदस्थ नितिन विश्वकर्मा, देवास ग्रामीण के अजय नागर और टोंकखुर्द के विशाल टईया को एक माह का अग्रिम वेतन देकर सेवा से पृथक करने संबंधी आदेश जारी किए हैं। इन तीनों को फरवरी 2024 में 3 वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर नियुक्त किया गया था। जांच और अनुविभागीय अधिकारियों के प्रतिवेदन में सामने आया कि ये पटवारी अपने हलके में निवास नहीं कर रहे थे, समय पर उपस्थिति दर्ज नहीं करा रहे थे और बीते 6 माह में इनकी राजस्व वसूली भी अत्यधिक असंतोषजनक पाई गई।

गुना में पटवारी संघ अध्यक्ष समेत 4 सस्पेंड, 4 पटवारियों की सेवा समाप्त

दूसरी ओर गुना जिले में भी ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ में निर्धारित काम न करने और घोर लापरवाही बरतने पर जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। गुना जिले में इस योजना के तहत अब तक एक भी रजिस्ट्री न होने के कारण जिले की रैंकिंग मध्य प्रदेश में फिसलकर 54वें स्थान पर पहुंच गई थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने 4 पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जिसमें जिला पटवारी संघ के अध्यक्ष महेंद्र किरार भी शामिल हैं। इनके अलावा निलंबित होने वाले पटवारियों में ललित मोहन शर्मा, तहसील बमौरी, विजय सिंह भील, तहसील कुंभराज और मेहरबान भील, तहसील मकसूदनगढ़ शामिल हैं। वहीं 4 ट्रेनी पटवारियों को सेवा समाप्ति का नोटिस थमाते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।

काम का विरोध और रजिस्ट्री न करने की जिद पड़ी भारी

दरअसल पटवारियों ने 15 सितंबर को जिला स्तर पर ज्ञापन सौंपकर स्वामित्व योजना के तहत काम करने से स्पष्ट इनकार कर दिया था। पटवारियों का कहना था कि वे काम से पीछे नहीं हट रहे हैं लेकिन योजना में रजिस्ट्री का काम करने पर किसी भी गड़बड़ी या कार्रवाई की जिम्मेदारी उन्हीं पर आ जाएगी। हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की निरंतर अवहेलना और एसडीएम द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस का संतोषजनक जवाब न मिलने के बाद कलेक्टर्स ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों और परिवीक्षा संबंधी शर्तों के तहत यह कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।

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