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‘साहब’ का ‘अधूरा ज्ञान’, गरीब परेशान! मनरेगा अधिकारी ने फोर्टिफाइड राइस को बताया प्लास्टिक का चावल, भ्रमित हुए ग्रामीण, लेने से किया मना

अजयारविंद नामदेव, शहडोल। शहडोल जिले के मनरेगा अधिकारी का ‘अधूरा’ ज्ञान प्रशासन के लिए मुसीबत का सबब बन गया। निरीक्षण करने पहुंचे मनरेगा अधिकारी का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उचित मूल्य दुकान के निरीक्षण के दौरान वो फोर्टिफाइड राइस (fortified rice) को प्लास्टिक चावल कहते नजर आ रहे हैं। जिससे ग्रामीणों में भ्रम की स्थित बन गई है।

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दरअसल, मनरेगा परियोजना अधिकारी राहुल सक्सेना मनरेगा कार्यों का निरीक्षण करने के लिए बुढ़ार विकास खंड अंतर्गत ग्राम खरला पहुंचे थे, जहां अपना मूल काम छोड़ ‘साहब’ शासकीय उचित मूल्य दुकान का निरीक्षण करने पहुंच गए और और वहां रखे चावल की गुणवत्ता परखना शुरू कर दिया। साहब की सिर्फ मनरेगा के निर्माण कार्यों का अनुभव था, इसलिए उन्होंने जानकारी के अभाव में दर्जनों ग्रामीण हितग्राहियों के सामने ही उचित मूल्य की दुकान के संचालक से फोर्टिफाइड चावल को प्लास्टिक चावल बताकर ग्रामीणों में भ्रम पैदा कर दिया। इतना ही नहीं ‘साहब’ ने बाकायदा चावल की जांच के लिए सैम्पल भी लिए। इससे ग्रामीण हितग्राहियों की शंका और प्रबल हो गई कि यह चावल प्लास्टिक का ही होगा।

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अधिकारी के जाने के बाद हितग्राहियों ने चावल लेने से मना कर दिया। मनरेगा परियोजना अधिकारी का अधूरा ज्ञान अब प्रशासन के लिए एक नई मुसीबत खड़ा कर दिया है। उनके इस ड्रामा का वीडियो वहां मौजूद एक शख्स ने बना लिया जो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।

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बता दें कि प्लास्टिक की तरह दिखने वाला यह चावल दरअसल कुपोषण व एनीमिया की रोकथाम के लिए बांटा जा रहा है। चावल में विटामिन, प्रोटीन जैसे पौष्टिक तत्व भरपूर हैं। लेकिन अधिकारी की ‘गलती’ ने लोगों में भ्रम पैदा कर दिया है।

वहीं इस मामले में मनरेगा परियोजना अधिकारी राहुल सक्सेना का कहना है कि उन्होंने कोई भ्रम नहीं फैलाया है, ग्रामीणो की शिकायत पर चावल का सैम्पल लेकर सम्बंधित अधिकारी को दे दिया था, उन्हें आज पता चला कि वह फोर्टिफाइड चावल है।

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