रोहित कश्यप, मुंगेली। नेवासपुर में नाबालिग हत्याकांड से जुड़े मामले में न्यायिक रिमांड को लेकर महत्वपूर्ण न्यायालयीन घटनाक्रम सामने आया है। प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सोम, मुंगेली की अदालत ने राज्य शासन की ओर से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM), मुंगेली के पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया है। पुनरीक्षण न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि चुनौती दिए गए आदेश का परीक्षण करने पर वह विधि और तथ्यों के अनुरूप नहीं पाया गया। अदालत ने दोनों आरोपियों को 30 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, मुंगेली के समक्ष अग्रिम कार्रवाई हेतु उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

क्या है मामला?
न्यायालयीन दस्तावेज के अनुसार, सिटी कोतवाली मुंगेली में दर्ज अपराध क्रमांक 343/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103, 238 और 3(5) में मामला दर्ज है। दांडिक पुनरीक्षण प्रकरण में अजीत घृतलहरे, पिता शिवकुमार घृतलहरे, उम्र 22 वर्ष और साहिल खांडे, पिता दिलीप खांडे, उम्र 20 वर्ष को उत्तरवादी बनाया गया। दोनों ग्राम लिलवाकापा, थाना सिटी कोतवाली, जिला मुंगेली के निवासी बताए गए हैं।
आदेश में दर्ज विवरण के मुताबिक, 20 अक्टूबर 2026 की रात लगभग 12 बजे उत्तम मोहले के नाती रणवीर मोहले ने उन्हें बताया कि नाबालिग अपने बिस्तर पर अचेत अवस्था में पड़ी है और आवाज देने पर भी प्रतिक्रिया नहीं दे रही है। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई के बाद आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेजने की प्रक्रिया को लेकर कानूनी विवाद सामने आया।
CJM के रिमांड निरस्ती आदेश को राज्य ने दी थी चुनौती
मामले में आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेजने के लिए पुलिस ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था। निचली अदालत ने गिरफ्तारी से संबंधित कानूनी प्रक्रिया और आवश्यक सूचनाओं के लिखित अनुपालन के मुद्दे पर आपत्ति कर रिमांड को निरस्त किया। इसके बाद न्यायिक रिमांड का आवेदन स्वीकार नहीं किया गया और आरोपियों को व्यक्तिगत मुचलके पर छोड़े जाने का आदेश दिया गया।
राज्य शासन ने निचली अदालत के इस आदेश को चुनौती देते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 440 के तहत आपराधिक पुनरीक्षण याचिका क्रमांक 46/26 दायर की। पुनरीक्षण न्यायालय के समक्ष यह प्रश्न था कि चुनौती दिया गया आदेश कानून और उपलब्ध तथ्यों के अनुरूप है या नहीं।
दोनों पक्षों ने रखे अपने तर्क
न्यायालयीन आदेश के अनुसार, राज्य शासन की ओर से लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ठाकुर ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान गिरफ्तारी के आधार की लिखित जानकारी और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के पालन का मुद्दा उठाया गया। आदेश में उच्चतम न्यायालय के मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं एक अन्य मामले का भी संदर्भ दर्ज है। न्यायालय ने संबंधित पुलिस केस डायरी और रिमांड से जुड़े अभिलेखों का परीक्षण किया।
पुनरीक्षण न्यायालय का फैसला
प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सोम की अदालत ने अभिलेखों और चुनौती दिए गए आदेश का परीक्षण करने के बाद राज्य की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार कर ली। न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का आलोच्य आदेश विधि और तथ्यों के अनुरूप नहीं है। इसके बाद निचली अदालत का आदेश निरस्त कर दिया गया।
न्यायालय ने संबंधित रिमांड प्रपत्र और सिटी कोतवाली की केस डायरी आवश्यक कार्रवाई एवं अनुपालन के लिए वापस भेजने का निर्देश भी दिया है। साथ ही, दोनों आरोपियों को 30 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, मुंगेली के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा गया है, ताकि आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जा सके।
अब आगे क्या होगा?
इस आदेश के बाद मामले में अगला महत्वपूर्ण चरण मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली कार्यवाही होगी। हालांकि, आदेश को आरोपियों की दोषसिद्धि या तत्काल जेल भेजने के निर्देश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पुनरीक्षण न्यायालय ने निचली अदालत के पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए आरोपियों को निर्धारित समय पर उपस्थित होने का निर्देश दिया है। आगे की कार्रवाई न्यायालय में होने वाली प्रक्रिया और पारित होने वाले आदेशों पर निर्भर करेगी।
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