मुजफ्फरपुर। जिले स्थित भिखनपुरा मोड़ से संदिग्ध परिस्थितियों में अगवा किए गए चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) रतन कुमार झा और उनके साथी संतोष यादव को पुलिस की विशेष टीम ने महज 24 घंटे के भीतर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से सकुशल बरामद कर लिया है। मुजफ्फरपुर पुलिस की तत्परता से दोनों को अपराधियों के चंगुल से छुड़ाया गया। जांच के दौरान इस हाई-प्रोफाइल अपहरण कांड का मुख्य कारण करोड़ों रुपये की वित्तीय ठगी का पुराना विवाद सामने आया है।
हाईवे पर गाड़ियों से घेरकर किया गया किडनैप
पीड़ित सीए रतन कुमार झा ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह व्यावसायिक बैठक के सिलसिले में संतोष यादव के साथ मुजफ्फरपुर आए थे। जैसे ही उनकी गाड़ी हाईवे पर एक होटल से कुछ दूरी पर पहुंची, चार अलग-अलग वाहनों में सवार करीब 15 से 20 बदमाशों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद जबरन उन्हें एक ब्रेजा गाड़ी में बिठाकर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की तरफ ले जाया गया।
बंधक बनाकर मारपीट
रतन झा के अनुसार, अपहरणकर्ताओं ने रास्ते भर उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया। गाजीपुर पहुंचने के बाद उनकी आंखें ढक दी गईं, गला घोंटने का प्रयास किया गया और जब उन्होंने मदद के लिए गाड़ी का शीशा नीचे कर शोर मचाने की कोशिश की, तो उन पर हथियार से हमला कर दिया गया। इतना ही नहीं, बदमाशों ने पिस्टल की नोक पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। गनीमत यह रही कि रतन का मोबाइल चालू रह गया था, जिससे उनके परिजनों को घटना की भनक लग गई और उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचित किया।
90 करोड़ रुपये के एनजीओ फ्रॉड से जुड़े तार
मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी ने बताया कि 11 अक्टूबर को अपहरण की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष जांच दल का गठन किया गया था। जांच में पता चला कि मूल रूप से गाजीपुर का रहने वाला संतोष यादव ‘अंजलि फाउंडेशन’ नाम से एक एनजीओ चलाता था। उस पर कम समय में पैसे दोगुने करने का प्रलोभन देकर लोगों से लगभग 80 से 90 करोड़ रुपये ऐंठने और फरार होने का गंभीर आरोप है।
पुलिस की सख्त कार्रवाई और वैधानिक रुख
गाजीपुर पुलिस में भी संतोष यादव के खिलाफ धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज हैं। आरोपी पक्ष का दावा था कि वे अपनी डूबी हुई रकम की वसूली के लिए संतोष को पकड़कर थाने ले जा रहे थे। हालांकि, मुजफ्फरपुर पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून को अपने हाथ में लेकर किसी का भी अपहरण करना पूरी तरह गैरकानूनी है। पुलिस ने घटना के दिन ही एक मुख्य आरोपी देवेंद्र देवचंद यादव को धर दबोचा था। फिलहाल सदर थाने में मामला दर्ज कर पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है।

