मुजफ्फरपुर। जिले के सिवाईपट्टी थाना क्षेत्र में महादलित समुदाय के मदन बैठा उर्फ मदन चौधरी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में अदालत के सख्त आदेश के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष सह वर्तमान लालगंज थानाध्यक्ष मनमोहन कुमार समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ एससी-एसटी थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मृतक की पत्नी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद यह कानूनी कदम उठाया गया है।

​पुलिस हिरासत में मारपीट और जातिसूचक गालियों का आरोप

​मृतक की पत्नी सीता देवी द्वारा अदालत में दायर किए गए परिवाद के अनुसार, यह घटना 22 अक्टूबर 2024 की दोपहर करीब 2:45 बजे की है। आरोप है कि सिवाईपट्टी थाने की पुलिस तीन गाड़ियों में सवार होकर उनके घर पहुंची थी। इस दौरान तत्कालीन थानाध्यक्ष मनमोहन कुमार के साथ-साथ एसआई शशि भूषण कुमार, अदिति कुमारी, अब्दुल्ला और आठ से दस अन्य पुलिसकर्मी मौजूद थे।
​परिवाद में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिसकर्मियों ने घर में घुसते ही मदन बैठा को जातिसूचक गालियां दीं और उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। बीच-बचाव करने आई उनकी बेटी के साथ भी दुर्व्यवहार और मारपीट किए जाने की बात कही गई है। इसके बाद पुलिसकर्मी उन्हें जबरन गाड़ी में बैठाकर अपने साथ ले गए थे।

​घर से कुछ ही दूरी पर बिगड़ी तबीयत और इलाज के दौरान मौत

​शिकायत में बताया गया है कि घर से महज 200 मीटर की दूरी पर ले जाने के बाद मदन बैठा की तबीयत अचानक काफी बिगड़ गई, जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें गाड़ी से नीचे उतार दिया। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए परिजन उन्हें तुरंत मीनापुर अस्पताल ले गए, जहां से डॉक्टरों ने उन्हें एसकेएमसीएच (SKMCH) रेफर कर दिया।
​बेहतर इलाज के लिए उन्हें मेडिकल ओवरब्रिज के पास एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान 23 अक्टूबर 2024 को उनकी मौत हो गई। परिजनों का साफ तौर पर आरोप है कि पुलिस की थर्ड डिग्री टॉर्चर और पिटाई की वजह से ही उनकी ऐसी हालत हुई और उनकी जान चली गई।

​उच्च अधिकारियों तक गुहार और जबरन हस्ताक्षर कराने का आरोप

​घटना के तुरंत बाद पीड़िता सीता देवी ने जिला के एसएसपी और डीआईजी को लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई थी। हालांकि, आरोप है कि शुरुआती स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
​इसके बाद 25 अक्टूबर को अहियापुर के तत्कालीन एसआई राहुल कुमार और सिवाईपट्टी थानाध्यक्ष मनमोहन कुमार पर मृतक के बेटे शशि रंजन कुमार को डरा-धमकाकर एक सादे आवेदन पर जबरन हस्ताक्षर कराने का गंभीर आरोप लगा है। परिजनों का कहना है कि इसी फर्जी आधार पर पुलिस ने एक ऐसा मामला दर्ज किया, जिसमें पुलिसकर्मियों को पूरी तरह बेकसूर बताते हुए सारा ठीकरा अन्य लोगों पर फोड़ दिया गया।

​जमीन विवाद से जुड़ी है पुरानी रंजिश

​यह पूरा विवाद मूल रूप से जमीन और अतिक्रमण से जुड़ा बताया जा रहा है। परिवाद में 5 और 6 सितंबर 2024 को हुई भूमि को लेकर तकरार का भी जिक्र है, जिसमें दोनों पक्षों की ओर से पूर्व में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
​सीता देवी का आरोप है कि इसके बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष और जांच अधिकारी शशि भूषण कुमार दूसरे पक्ष के प्रभाव में आ गए। एफआईआर में पुलिसकर्मियों के अलावा मुकेश बैठा, शंकर बैठा, लालबाबू बैठा, पिंकी देवी, मंतोष कुमार और विक्की कुमार को भी आरोपी बनाया गया है। इन पर परिवार को लगातार डराने-धमकाने और जमीन हड़पने की साजिश रचने का गंभीर आरोप है। फिलहाल अदालत के हस्तक्षेप के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की कानूनी जांच जारी है।