मुजफ्फरपुर। जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र के उच्च माध्यमिक विद्यालय शाहबाजपुर में शुक्रवार की सुबह स्कूल की छत पर टिफिन के दौरान बड़ा हादसा हो गया। यहाँ करंट लगने से छात्राएं गंभीर रूप से झुलस गईं। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और स्कूल प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

​11 हजार वोल्ट के तार की चपेट में आईं छात्राएं

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कूल की छत के ठीक ऊपर से 11 हजार वोल्ट का हाई-टेन्शन बिजली का तार गुजर रहा है। आशंका जताई जा रही है कि इसी हाई-वोल्टेज तार के संपर्क में आने या उसके आसपास करंट प्रवाहित होने के कारण छात्राएं इसकी चपेट में आ गईं। हालांकि, अभी तक करंट लगने की वास्तविक और पुख्ता वजह सामने नहीं आ सकी है।
​घायल छात्रा नेहा ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि वे सभी टिफिन के समय छत पर गई थीं। जैसे ही उसने छत की दीवार पर हाथ रखा, उसे तेज झटका लगा और वह नीचे गिर गई। उसे बचाने की कोशिश में अन्य छात्राएं भी इसकी चपेट में आ गईं। एक अन्य छात्रा दिव्यानी को भी करंट का तेज झटका लगा। इसके बाद मौके पर मौजूद श्रुति नाम की साहसी छात्रा ने हिम्मत दिखाते हुए अन्य बच्चियों को नीचे सुरक्षित पहुंचाया।

​अस्पताल ले जाने में स्कूल प्रबंधन की लापरवाही का आरोप

​प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों ने स्कूल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वैभव कुमार नामक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि करंट लगने से एक छात्रा का हाथ और पैर बुरी तरह झुलस गया था और उसके शरीर में तेज झटके उठ रहे थे। आरोप है कि घायल बच्चियों को तुरंत अस्पताल ले जाने के लिए स्कूल का मुख्य गेट समय पर नहीं खोला गया।
​इतना ही नहीं, गेट खुलने के बाद भी स्कूल की गाड़ी में घायल छात्राओं को बैठाकर अस्पताल ले जाने की अनुमति नहीं दी गई। ऐसी आपातकालीन स्थिति में भी जब स्कूल प्रबंधन की ओर से कोई मदद नहीं मिली, तब स्थानीय लोगों ने किसी तरह एक ऑटो को रोककर सभी घायल छात्राओं को इलाज के लिए एसकेएमसीएच (SKMCH) में भर्ती कराया।

​प्रत्यक्षदर्शियों और स्कूल प्रबंधन के बयानों में विरोधाभास

​इस पूरी घटना को लेकर चश्मदीदों और स्कूल के शिक्षकों के बयानों में काफी अंतर देखने को मिला है। जहाँ प्रत्यक्षदर्शियों और घायल छात्राओं का कहना है कि इस हादसे में तीन छात्राएं गंभीर रूप से झुलसी हैं, वहीं स्कूल के एक शिक्षक ने केवल दो छात्राओं के घायल होने की बात स्वीकार की है। शिक्षक ने यह तो माना कि स्कूल की छत के ऊपर से 11 हजार वोल्ट का खतरनाक बिजली तार गुजरता है और हादसा टिफिन के समय हुआ, लेकिन इसके अलावा उन्होंने इस संवेदनशील मामले पर कुछ भी बोलने और जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया।
​फिलहाल, इस पूरे मामले में करंट लगने के असली कारणों और समय पर मदद न पहुंचाने को लेकर स्कूल प्रबंधन की संदेहास्पद भूमिका की जांच की जा रही है। एक छात्रा की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिसका डॉक्टर लगातार इलाज कर रहे हैं।