वीरेंद्र कुमार, नालंदा। बिहार में अप्रैल 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी के बावजूद कानून के उल्लंघन का सिलसिला थम नहीं रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री के गृह जिले नालंदा से हाल ही में मद्यनिषेध एवं उत्पाद विभाग की एक विस्तृत रिपोर्ट सामने आई है, जो कानून के पालन और जमीन पर चल रही चुनौतियों की एक अलग तस्वीर पेश करती है।
व्यापक अभियान और कार्रवाई के आंकड़े
मद्यनिषेध विभाग की जनवरी से सितंबर 2026 तक की समग्र रिपोर्ट बताती है कि अवैध शराब के खिलाफ प्रशासन कितना आक्रामक है। इस दौरान जिले में कुल 53,162 छापेमारी की गईं और विभिन्न धाराओं के तहत 1,699 अभियोग दर्ज किए गए।
- गिरफ्तारियां: कुल 2,039 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। इनमें 1,541 मामले शराब सेवन से और 498 मामले शराब बेचने, बनाने, भंडारण या होम डिलीवरी से जुड़े हैं।
- बरामदगी: इस अवधि में कुल 48,142.330 लीटर शराब जब्त की गई, जिसमें 43,314.515 लीटर देशी/चुलाई शराब और 4,827.815 लीटर विदेशी शराब व बीयर शामिल है।
- वाहन जब्ती: अवैध तस्करी में इस्तेमाल होने वाले 64 वाहनों को भी जब्त किया गया है।




महिलाओं की बढ़ती संलिप्तता: एक नई चिंता
रिपोर्ट का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि इस अवैध कारोबार में महिलाओं की संलिप्तता लगातार बढ़ रही है। मई से अगस्त 2026 के बीच धारा 30 के तहत 67 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया।
- मासिक आंकड़े: मई में 15, जून में 11, जुलाई में 19 और अगस्त में 22 महिलाओं को शराब के साथ पकड़ा गया। इन चार महीनों में कुल 327.050 लीटर देशी और 9.750 लीटर विदेशी शराब महिलाओं के पास से बरामद हुई।
- तुलना: इसी चार महीने की अवधि में 196 पुरुषों की भी गिरफ्तारी हुई (136 देशी और 60 विदेशी शराब मामले)।
- विशेष कारण: जानकारों का मानना है कि आर्थिक मजबूरी, घर के पुरुषों के जेल जाने के बाद कारोबार संभालना, या तस्करों द्वारा महिलाओं को ‘कैरियर’ के रूप में इस्तेमाल करना इसके मुख्य कारण हो सकते हैं।
प्रशासन की रणनीति और जागरूकता अभियान
प्रशासन सिर्फ दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थिति से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा भी ले रहा है।
- ड्रोन और डॉग स्क्वायड: ग्रामीण इलाकों, नदी कछारों और दुर्गम क्षेत्रों में निगरानी के लिए ड्रोन और डॉग स्क्वायड की मदद ली जा रही है।
- काउंसलिंग और आजीविका: संवेदनशील इलाकों में लोगों को जागरूक किया जा रहा है और महिलाओं को वैकल्पिक आजीविका से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।


