वीरेंद्र कुमार, नालंदा। जिले के एक सरकारी विद्यालय में शिक्षकों की कथित लापरवाही और विद्यालय के शैक्षणिक माहौल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शिकायतकर्ता ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को आवेदन देकर दो शिक्षकों पर हाजिरी बनाकर विद्यालय से गायब रहने और एक पूर्व प्रभारी शिक्षक पर गुटबाजी करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
जिला शिक्षा पदाधिकारी, नालंदा को 2 अक्टूबर 2026 को सौंपे गए आवेदन के अनुसार, विद्यालय के दो शिक्षक उपस्थिति रजिस्टर में अपनी हाजिरी दर्ज कराने के बाद कक्षाओं से नदारद रहते हैं।
शिकायतकर्ता ने दावा किया कि 8 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब 10:34 बजे जब उन्होंने विद्यालय का मुआयना किया, तो दोनों शिक्षक अपनी कक्षाओं से गायब मिले। इस दौरान जब उनके मोबाइल नंबरों पर संपर्क साधने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन कॉल रिसीव नहीं किए। शिकायतकर्ता ने इन दावों के समर्थन में मौके की फोटोग्राफ्स होने का भी दावा किया है।
पूर्व प्रभारी शिक्षक पर राजनीति
मामले में केवल उपस्थिति का ही विवाद नहीं है, बल्कि विद्यालय के एक पूर्व प्रभारी शिक्षक सतीश कुमार सुमन पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि वे विद्यालय परिसर में बच्चों को पढ़ाने के बजाय राजनीति, गुटबाजी और आपसी षड्यंत्र को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे शिक्षण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
बच्चों की पढ़ाई पर असर
शिकायतकर्ता का कहना है कि शिक्षकों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को पहले भी कई बार मौखिक और लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस विभागीय कार्रवाई नहीं हुई है। इससे स्थानीय स्तर पर गहरी नाराजगी है।
आगे की कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल इन सभी आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है। संबंधित शिक्षकों और शिक्षा विभाग की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया आना अभी शेष है। अब सबकी निगाहें जिला शिक्षा पदाधिकारी पर टिकी हैं कि वे इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर क्या कदम उठाते हैं।

