Naresh Meena Jaipur March: किसानों को जमीन के रकबे के हिसाब से खाद देने की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे युवा नेता नरेश मीणा ने प्रशासन से बातचीत विफल होने के बाद बारां से जयपुर के लिए पैदल कूच शुरू कर दिया। शनिवार को वे हाथ में झाड़ू लेकर समर्थकों के साथ रवाना हुए। बारां से मांगरोल के बीच खराब सड़क पर नंगे पैर चलने से उनके पैरों में छाले पड़ गए। इसके बाद समर्थक उन्हें हाथ ठेले पर बैठाकर मांगरोल ले गए। करीब साढ़े चार घंटे की यात्रा के बाद वे रात करीब 9:30 बजे मांगरोल पहुंचे।

खाद को लेकर प्रशासन से नहीं बनी बात

नरेश मीणा पिछले दो दिनों से बारां कलेक्ट्रेट पर किसानों की खाद से जुड़ी मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे थे। प्रशासन के साथ हुई बातचीत में खाद के साथ दूसरी दवाइयां बेचने की व्यवस्था यानी अटैचमेंट हटाने पर सहमति बन गई। हालांकि किसानों को उनके खेत के रकबे के हिसाब से पर्याप्त खाद देने के मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। प्रशासन की ओर से प्रति किसान पांच-पांच कट्टे खाद देने का प्रस्ताव रखा गया था। नरेश मीणा ने इसे स्वीकार नहीं किया।

नंगे पैर चले, पैरों में पड़े छाले

बातचीत बेनतीजा रहने के बाद नरेश मीणा ने जयपुर कूच का ऐलान किया। बारां से मांगरोल की ओर उन्होंने पैदल यात्रा शुरू की। खराब सड़क के कारण वे नंगे पैर चल रहे थे। करीब साढ़े चार घंटे चलने के बाद उनके पैरों में छाले पड़ गए। इसके बाद समर्थकों ने उन्हें हाथ ठेले पर बैठाया और धक्का देकर मांगरोल तक पहुंचाया।

बोले- अकेला निकला हूं, कारवां बढ़ता जा रहा

जयपुर रवाना होने से पहले नरेश मीणा ने कहा कि वे अकेले निकल रहे हैं, लेकिन उनका कारवां लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि रास्ते में लोग उन्हें पानी पिला रहे हैं और उनके साथ चल रहे हैं। मीणा ने कहा कि किसानों को उनका हक दिलाए बिना वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने इस आंदोलन को किसानों की आवाज बताया।

मांगरोल में नुक्कड़ सभा, आगे इटावा का रूट

मांगरोल पहुंचने के बाद नरेश मीणा ने समर्थकों के साथ खाद और स्थानीय मुद्दों को लेकर नुक्कड़ सभा की। इसके बाद रात में मांगरोल में ही विश्राम किया। अगले दिन रविवार सुबह 10 बजे मांगरोल से आगे की यात्रा शुरू करने की योजना है। दिनभर पैदल चलने के बाद उनका रात्रि विश्राम कोटा जिले के इटावा में रहेगा।

मुख्यमंत्री से बातचीत की मांग

प्रशासन के साथ बातचीत विफल होने के बाद नरेश मीणा ने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री से सीधी बात नहीं होती और किसानों की मांग का समाधान नहीं निकलता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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