राष्ट्रीय जनसेवा मंडल ने भीषण गर्मी से पक्षियों को बचाने के लिए विभिन्न स्थानों पर पानी के सिकोरे लगाए हैं। मंडल पिछले 40 वर्षों से जीव-जंतुओं के संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है।

गुलशन कुमार, महेंद्रगढ़। भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच पक्षियों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय जनसेवा मंडल द्वारा विभिन्न स्थानों पर पानी के सिकोरे लगाए गए हैं। इस मानवीय अभियान का नेतृत्व मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन बाछौदिया ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में जल स्रोत सूख जाने के कारण पक्षियों को भारी समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का यह नैतिक दायित्व बनता है कि वह अपने घर, दुकान, कार्यालय अथवा सार्वजनिक स्थानों पर पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करे। एक छोटा सा सिकोरा भी असंख्य पक्षियों के जीवन की रक्षा कर सकता है और उन्हें भीषण प्यास से राहत दिला सकता है।

जीवों के प्रति संवेदनशीलता जरूरी है

पवन बाछौदिया ने आगे कहा कि पर्यावरण संरक्षण और जीवों के प्रति संवेदनशीलता हमारी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पक्षियों की चहचहाहट प्रकृति की सुंदरता को बढ़ाती है, इसलिए उनके संरक्षण के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना चाहिए। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे इन दिनों में नियमित रूप से सिकोरों में स्वच्छ पानी भरें और पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करना सुनिश्चित करें। राष्ट्रीय जनसेवा मंडल के पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि उनका संगठन पिछले 40 वर्षों से निरंतर समाज सेवा के कार्यों में जुटा हुआ है। आने वाले समय में भी वे पक्षियों एवं अन्य जीव-जंतुओं के संरक्षण हेतु जागरूकता अभियान को जोर-शोर से जारी रखेंगे।

जागरूकता अभियान आगे भी जारी रहेगा

इस सेवा कार्य के दौरान दीपक शर्मा (डायरेक्टर JMRRC), धर्मेंद्र वशिष्ठ (प्रधान, गौड़ ब्राह्मण सभा, अटेली), जिला पार्षद ठाकुर अजीत सिंह तँवर, युविक शर्मा, करण कौशिक, हिमांशु जांगड़ा, अंकित रोहिल्ला और शुभम गुप्ता सहित मंडल के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में लोगों से प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया। जनसेवा मंडल का यह प्रयास समाज में जीव-दया की भावना को प्रेरित कर रहा है। निरंतर चल रहे इस सेवा अभियान को स्थानीय लोगों का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है। यह पहल न केवल पक्षियों के लिए जीवन रक्षक साबित हो रही है, बल्कि आम नागरिकों को भी पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का एक सार्थक माध्यम बन गई है।