दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में गेहूं उपार्जन के नाम पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और समितियों पर प्रशासन का चाबुक चल गया है। कलेक्टर सोमेश मिश्रा के कड़े तेवरों के बाद जिले के खरीदी केंद्रों में हड़कंप मच गया है। किसानों को घंटों लाइन में खड़ा रखने और अव्यवस्था फैलाने के आरोप में 3 केंद्र प्रभारियों को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि 12 समितियों को ब्लैकलिस्ट (अपात्र) करने का नोटिस थमा दिया गया है।
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सहकारिता उप आयुक्त शिवम मिश्रा ने बताया कि मामला 11 मई की टीएल बैठक से गरमाया, जहां कलेक्टर ने उपार्जन की सुस्त रफ्तार पर जमकर क्लास ली। जांच में खुलासा हुआ कि कई केंद्रों पर हम्मालों की व्यवस्था ही नहीं की गई थी। नतीजा यह हुआ कि तौल कांटा थमा रहा और भीषण गर्मी में किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें लग गईं। प्रशासन ने इसे ‘जानबूझकर की गई लापरवाही’ माना है। हमने त्वरित एक्शन लेते हुए सुरेश कुमार चौरे (सहायक समिति प्रबंधक, सेमरीखुर्द),सुनील कुमार वर्मा (प्रभारी, खपरिया वेयरहाउस) एवं प्रद्युम्न कुमार यादव (प्रभारी, बिसौनीकलां) के प्रभारियों को घर बैठा दिया है। इसके अलावा रमपुरा, खपरिया और कोठरा के प्रबंधकों से जवाब तलब किया गया है, वहीं बैंक कैडर के दो बड़े अफसरों पर विभागीय कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
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प्रशासन ने डोलरिया, बनखेड़ी और पगढाल समेत 12 समितियों को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उन्हें भविष्य की खरीदी प्रक्रियाओं से बाहर कर दिया जाए? इन समितियों के पास सफाई देने के लिए सिर्फ 3 दिन का वक्त है। अगर किसानों के पसीने की कीमत चुकाने में कोताही हुई, तो कुर्सी सलामत नहीं रहेगी!

