Neha Bora Controversy: मुख्य चुनाव आयुक्त यानी सीईसी ज्ञानेश कुमार (CEC Gyanesh Kumar) को हटाने और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) रद्द करने को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी नेता अभिजीत दीपके लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों में इन दोनों के एक और शख्स जमकर ज्ञानेश कुमार और मोदी सरकार के खिलाफ हुंकार भर रही है। ये शख्स ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी एआईएसए (AISA) अध्यक्ष नेहा बोरा है। प्रोटेस्ट में नेहा बोरा राहुल गांधी की ‘पोस्टर गर्ल’ बनकर उभरी है। पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर जारी प्रदर्शनों से लेकर सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रोटेस्ट तक नेहा बोरा हर मोर्चे पर ‘पोस्टर गर्ल’ बनी हुई है। हालांकि विवादों में रहने वाली नेहा बोरा का इन प्रदर्शनों में भी विवाद जारी है।

पिछले दिनों नेहा बोरा प्रोटेस्ट में ‘खोपड़ी’ वाली टीशर्ट पहनकर सड़कों पर उतरीं। नेहा बोरा की इस ‘वन पीस’ वाली टी-शर्ट ने देश के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। वहीं अब सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन की तुलना ‘बांग्लादेश क्रांति’ से कर डाली। इसे लेकर बीजेपी ने नेहा बोरा और राहुल गांधी पर निशाना साधा है।

नेहा बोरा ने बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट (SSF) के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन के मौके पर 14 अक्टूबर को दिए संदेश में कहा कि बांग्लादेश ने उन्हें क्रांति का रास्ता दिखाया है। उन्होंने बांग्लादेश के छात्र आंदोलन से प्रेरणा लेने और उससे सबक सीखने की बात कही। नेहा बोरा ने कहा कि हम आपको रास्ता दिखाने के लिए बधाई देते हैं। हम जानते हैं कि आपके देश में धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ जो लड़ाई आप लड़ रहे हैं, वही लड़ाई आज यहां के युवा भी लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह बांग्लादेश के छात्रों के साथ एकजुटता जाहिर करती हैं और उनके आंदोलनों से प्रेरणा लेती हैं।

भारत और बांग्लादेश के युवाओं के संघर्ष के बीच तुलना की

नेहा बोरा ने भारत और बांग्लादेश के युवाओं के संघर्ष के बीच तुलना भी की। बोरा ने कहा कि बांग्लादेश में युवा धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ रहे थे, जबकि भारत में छात्र मोदी सरकार के खिलाफ इसी तरह की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और बांग्लादेश के युवा मिलकर बेहतर दक्षिण एशिया और बेहतर दुनिया के लिए संघर्ष कर सकते हैं।

विवादित ‘खोपड़ी’ वाली टीशर्ट पहनकर सड़कों पर उतरी

10 और 11 अक्टूबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा खोपड़ी और उसके नीचे लिखा ‘वन पीस’ टी-शर्ट पहनकर सड़कों पर उतरीं। नेपाल में भी Gen-Z के प्रदर्शनों के दौरान ‘वन पीस’ का झंडा नजर आया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सरकार के बैन के विरोध से शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे बड़ा होता गया। युवाओं ने ‘वन पीस’ के स्ट्रॉ हैट पाइरेट्स वाले झंडे को सत्ता के खिलाफ विरोध और बदलाव की मांग के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया था।

दरअसल इस चिह्न का इस्तेमाल 17वीं और 18वीं सदी में समुद्री लुटेरे अलग-अलग डिजाइन वाले झंडों का इस्तेमाल करते थे। काला झंडा कई बार सामने वाले जहाज को डराकर आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने का संकेत होता था। लाल झंडे का इस्तेमाल ज्यादा घातक इरादे का संकेत देने के लिए किया जाता था।

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