गुलशन कुमार, नारनौल। नांगल चौधरी विधानसभा क्षेत्र के गांव धौलेड़ा में रविवार को एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया. बाबा भैया स्थान पर हुई इस विशेष बैठक में पूरे गांव के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य स्वामी दयानंद सरस्वती की आर्य समाज की विचारधारा को घर-घर तक पहुंचाना और सामाजिक सुधारों को गति देना था. बैठक में पुरानी कार्यकारिणी के वरिष्ठ पदाधिकारी मास्टर दुलीचंद, मास्टर छोटेलाल, कैप्टन चंदगीराम और छाजू राम समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे. सभी ग्रामीणों की आपसी सहमति से धौलेड़ा आर्य समाज की नई कार्यकारिणी का एलान किया गया.

सूबेदार राजेंद्र सिंह को मिली कमान, युवाओं को जोड़ने पर रहेगा जोर

बैठक में सर्वसम्मति से सूबेदार राजेंद्र सिंह को आर्य समाज धौलेड़ा का नया प्रधान चुना गया है. इसके साथ ही कैप्टन अशोक कुमार को उपप्रधान, मास्टर सत्यवीर को मंत्री, डॉ. नरेश कुमार को उपमंत्री, सूबेदार विक्रम सिंह को कोषाध्यक्ष और गुलशन कुमार को मीडिया एवं सोशल मीडिया प्रभारी की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है. नई टीम ने जिम्मेदारी संभालते ही बड़ा फैसला लिया है कि आने वाले दिनों में गांव के युवाओं को इस संगठन से बड़े पैमाने पर जोड़ा जाएगा. इसके अलावा गांव में सफाई अभियान, शिक्षा का स्तर सुधारने, युवाओं को नशे की लत से दूर रखने और सामाजिक चेतना जगाने के लिए लगातार प्रोग्राम आयोजित करने पर भी सहमति बनी है.

साल 1939 में दादा रामजीलाल ने रखी थी नींव, घर पर हुआ था पहला जलसा

बैठक में मौजूद गांव के बुजुर्ग आर्य समाजियों ने संगठन के सुनहरे और ऐतिहासिक सफर की यादें ताजा कीं. उन्होंने बताया कि धौलेड़ा का आर्य समाज इस पूरे इलाके के सबसे पुराने और सक्रिय संगठनों में से एक है. इसकी शुरुआत गुलामी के दिनों में साल 1939-40 के दौरान महज 50 से 60 सदस्यों के साथ हुई थी. गांव के पहले आर्य समाजी और संस्थापक प्रधान दादा रामजीलाल आर्य ने अपने ही घर पर पहला जलसा यानी धार्मिक सभा आयोजित करके इसकी मजबूत नींव रखी थी. इसके बाद सतपाल आर्य वैद्य, अमर मुनी, जवाहर सिंह आर्य, नाहर सिंह शास्त्री और रामप्रताप आर्य भीष्म जैसे दर्जनों समाजसेवियों ने इस विचारधारा को आगे बढ़ाया.

सिर्फ पूजा-पाठ नहीं, गौरक्षा और समाज सुधार के लिए हमेशा लड़ा यह गांव

वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने बताया कि धौलेड़ा आर्य समाज कभी भी सिर्फ धार्मिक पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहा. इस संगठन ने हमेशा समाज में फैली कुरीतियों को मिटाने, गौरक्षा करने, पेड़-पौधे लगाने और शिक्षा का उजियारा फैलाने के लिए जमीनी स्तर पर काम किया है. पूर्व सरपंच रामनिवास आर्य ने तो राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं के बीच जाकर वैदिक संस्कारों का प्रचार-प्रसार किया था. वहीं हनुमान मुकदम जैसे जमीनी कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण को बचाने के लिए अपनी पूरी जिंदगी लगा दी. नई कार्यकारिणी के सदस्यों ने संकल्प लिया है कि वे अपने बुजुर्गों और पूर्वजों द्वारा स्थापित किए गए इन ऊंचे आदर्शों को टूटने नहीं देंगे और नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ेंगे.