Business Desk – कोटक महिंद्रा बैंक ने गुरुवार को अनूप कुमार साहा को नया मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल 3 साल का होगा और वे 1 जनवरी 2027 से पद संभालेंगे। साहा अभी बैंक में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। नियुक्ति की खबर के बाद बैंक के शेयर में 4% तक की तेजी आई और यह करीब 433 रुपए पर पहुंच गया।

32 साल का अनुभव, जनवरी 2026 में कोटक से जुड़े
अनूप साहा के पास 32 साल से ज्यादा का अनुभव है। इसमें 25 साल बैंकिंग और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल संस्थानों का अनुभव शामिल है। वह जनवरी 2026 में कोटक महिंद्रा बैंक से जुड़े थे। मार्च 2026 से वह रिटेल बैंकिंग, सरकारी कारोबार, डेटा एनालिटिक्स और मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
बजाज फाइनेंस में भी संभाले कई बड़े पद
साहा ने 2017 से जनवरी 2026 तक बजाज फाइनेंस में काम किया। उन्होंने प्रेसिडेंट-कंज्यूमर फाइनेंस से शुरुआत की। बाद में डिप्टी CEO-कंज्यूमर, MSME, मार्केटिंग, ऑपरेशंस एंड सर्विस और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी संभाली।
वह एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर भी रहे। अप्रैल से जुलाई 2025 तक वह बजाज फाइनेंस के MD और CEO थे। जुलाई 2025 में उन्होंने इस पद से इस्तीफा दिया था।
नियुक्ति के बाद शेयर 4% तक चढ़ा
अनूप साहा की नियुक्ति को ब्रोकरेज फर्म्स ने बैंक के लिए सकारात्मक कदम बताया है। इसके बाद कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर में 4% तक की तेजी देखने को मिली।
मौजूदा MD और CEO अशोक वासवानी ने साहा को फाइनेंशियल सेक्टर का अनुभवी लीडर बताया। उन्होंने कहा कि साहा को अलग-अलग बिजनेस और ग्राहकों की अच्छी समझ है और वह बैंक की मजबूत नींव को आगे बढ़ाएंगे।
साहा के सामने 3 बड़ी चुनौतियां
- डिपॉजिट बढ़ाना: लोग FD के अलावा शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में भी पैसा लगा रहे हैं। ऐसे में बैंक के लिए नए डिपॉजिट जुटाना चुनौती होगी।
- अनसिक्योर्ड लोन: RBI बिना गारंटी वाले पर्सनल लोन को लेकर सख्त है। साहा को बैंक की ग्रोथ और नियमों के बीच संतुलन बनाना होगा।
- मार्जिन पर दबाव: जमा पर ज्यादा ब्याज और ब्याज दरों में बदलाव से बैंक के मार्जिन पर असर पड़ सकता है। इसे संभालना भी बड़ी चुनौती होगी।
बैंकिंग सेक्टर में बदल रहा CEO चुनने का तरीका
नियोस्ट्रेट एडवाइजर्स के फाउंडर अबीजर दीवानजी के मुताबिक, बैंक अब CEO चुनते समय सिर्फ वफादारी के बजाय बिजनेस प्लान और उसे लागू करने की क्षमता पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। कोटक की नई नियुक्ति में भी रिटेल बैंकिंग विस्तार और फैसलों को तेजी से लागू करने पर फोकस माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, कोटक का यह कदम दूसरे बड़े बैंकों के लिए भी संकेत है। आने वाले समय में बैंकों के सामने NIM बढ़ाने और तेजी से नए डिपॉजिट जुटाने की चुनौती बनी रहेगी।

