NGT Gave Power To Delhi MCD For Delhi Pollution: देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी भी एक्शन मूड में आ गई है। प्रदूषण की जांच से बचने वाले फैक्ट्री संचालकों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। एनजीटी ने अब दिल्ली नगर निगम यानी दिल्ली एमसीडी को प्रदूषण जांच के दौरान बंद मिलने वाली फैक्ट्रियों के ताले तोड़ने की भी पावर दी है। एनजीटीने स्पष्ट किया है कि नगर निगम के अधिकृत अधिकारी कानून के तहत जरूरत पड़ने पर ऐसी इकाइयों के ताले तोड़कर निरीक्षण कर सकते हैं।
वहीं, जांच में कोई इकाई अवैध रूप से संचालित मिलती है तो उसका बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई भी की जाएगी। इसके लिए पुलिस की पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।
यह मामला वरुण गुलाटी की ओर से दायर आवेदन से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि गामड़ी गांव में कई औद्योगिक इकाइयां बिना अनुमति के चल रही हैं और उनसे भारी प्रदूषण फैल रहा है। इन इकाइयों में मेटल सर्फेस ट्रीटमेंट, निकेल इलेक्ट्रोप्लेटिंग, कांच पिघलाने, साइनाइड के इस्तेमाल और कपड़ों की रंगाई जैसी गतिविधियां शामिल हैं। मामले की जांच के लिए एनजीटी ने नवंबर 2024 में विभिन्न विभागों की संयुक्त समिति गठित की थी। निरीक्षण के दौरान कई परिसर बंद मिले, जिससे वहां चल रही गतिविधियों का पता नहीं लगाया जा सका। एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की बेंच ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के गामड़ी गांव में कथित रूप से अवैध औद्योगिक इकाइयों के संचालन से जुड़े मामले में यह निर्देश दिया है। एनजीटी ने उन इकाइयों का नए सिरे से निरीक्षण करने के भी आदेश दिए हैं।
मुआयना करने से पहले नोटिस देना जरूरी नहीं
एनजीटी ने इस कानूनी अड़चन पर विचार करते हुए नगर निगम अधिनियम, 1957 की धाराओं का उल्लेख किया। इनके तहत निगम आयुक्त या अधिकृत निगम अधिकारी निरीक्षण के लिए परिसर में प्रवेश कर सकते हैं। इसके लिए पहले से नोटिस देना जरूरी नहीं है।
MCD ने पुरानी दिल्ली में 3 अनाधिकृत धोबी घाट सील किए
इधर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने बिना शोधन किए अपशिष्ट जल को नालों और यमुना नदी में जाने से रोकने के लिए पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुरानी दिल्ली में तीन अवैध धोबी घाटों को सील कर दिया था। निरीक्षण के दौरान अपशिष्ट जल शोधन संयंत्रों में खामियां पाई गईं और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) से संचालन की अनुमति नहीं होने का पता चला। इसके अलावा, इन इकाइयों में ऐसे साबुन और कपड़े धोने के पदार्थों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
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