पटना। ​बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार ने लगभग 20 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद मुख्यमंत्री आवास (1, अणे मार्ग) को अलविदा कह दिया है। शनिवार को वे अपने नए आवंटित आवास 7, सर्कुलर रोड में पूरी तरह शिफ्ट हो गए। इस नए सफर में उनके बेटे निशांत कुमार भी उनके साथ रहेंगे। शुक्रवार को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर उन्होंने बौद्ध भिक्षुओं की उपस्थिति में नए घर में विशेष पूजा-अर्चना की थी, जिसके बाद शनिवार को शिफ्टिंग की प्रक्रिया पूरी की गई।

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की मुलाकात

​नीतीश कुमार के नए आवास पर शिफ्ट होते ही राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई। वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उनसे मिलने 7, सर्कुलर रोड पहुंचे। इस दौरान डिप्टी सीएम विजय चौधरी भी वहां मौजूद थे। तीनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई। सूत्रों के अनुसार, इस संक्षिप्त मुलाकात का मुख्य एजेंडा आगामी कैबिनेट विस्तार की रूपरेखा तैयार करना था। इससे पहले सुबह नीतीश कुमार ने डिप्टी सीएम विजेंद्र यादव से भी उनके आवास पर जाकर मुलाकात की थी।

​दूसरी बार छोड़ना पड़ा CM हाउस

​यह 20 साल में दूसरा मौका है जब नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री आवास खाली करना पड़ा है। इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने इस्तीफा दिया था और जीतन राम मांझी को कमान सौंपी थी। उस वक्त भी वे करीब 8 महीनों के लिए इसी 7, सर्कुलर रोड वाले बंगले में रहे थे। सुरक्षा के लिहाज से इस नए आवास पर भी Z+ श्रेणी का कड़ा पहरा तैनात कर दिया गया है।

​आधुनिक सुविधाओं से लैस ‘भूकंपरोधी’ बंगला

​नीतीश कुमार का नया आशियाना किसी आधुनिक किले से कम नहीं है। इसे उनकी सीधी निगरानी में तैयार किया गया है। यह बंगला आधुनिक तकनीक से निर्मित है और बड़े भूकंप के झटकों को सहने की क्षमता रखता है। इसके लॉन की खूबसूरती बढ़ाने के लिए विशेष रूप से कोलकाता से घास मंगवाई गई है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले तक इस बंगले का उपयोग मुख्यमंत्री सचिवालय के रूप में हो रहा था।

​लालू यादव के पड़ोसी बने नीतीश

​इस शिफ्टिंग के साथ ही बिहार की राजनीति के दो दिग्गज नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव अब पड़ोसी बन गए हैं। राबड़ी देवी का आवास यहां से महज 200 मीटर की दूरी पर है। वहीं, नीतीश कुमार का 7 नंबर से पुराना लगाव फिर चर्चा में है। 1977 में राजनीति की शुरुआत, रेल मंत्री के समय फोन का अंतिम अंक 7 होना, पहली गाड़ी का नंबर 777 होना और उनकी ‘7 निश्चय’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं, यह दर्शाती हैं कि नंबर 7 उनके जीवन और राजनीति में कितना महत्व रखता है।