दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट (Rouse Avenue Court) ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) से जुड़े कथित STP टेंडर घोटाला मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) नेता सत्येंद्र जैन ( Satyendar Jain) की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत अब 3 सितंबर को अपना फैसला सुना सकती है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका पर अदालत में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। अदालत में सुनवाई पूरी होने के बाद जब सत्येंद्र जैन बाहर निकले तो उन्होंने मीडिया के सामने ‘सत्यमेव जयते’ कहा।

DJB के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) प्रोजेक्ट की टेंडर प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार के मामले में दिल्ली की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में DJB के पूर्व CEO और IAS अधिकारी उदित प्रकाश राय भी शामिल हैं। इसके अलावा बोर्ड के पूर्व सलाहकार अंकित श्रीवास्तव को भी गिरफ्तार किया गया है। मामले में गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों की पहचान नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा के रूप में हुई है। ACB की कार्रवाई STP प्रोजेक्ट की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ी है। जांच एजेंसी मामले में टेंडर प्रक्रिया, उससे जुड़े अधिकारियों और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज दिग विनय सिंह ने DJB के कथित STP टेंडर घोटाला मामले में पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की जमानत अर्जी पर दलीलें सुनीं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जैन की जमानत याचिका पर अपना आदेश 3 सितंबर तक सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान जैन के अलावा मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपी पंकज वर्मा, उदित प्रकाश राय और राज कुमार कुर्रा भी अदालत में मौजूद रहे।

उदित प्रकाश राय की VC से पेशी की अपील मंजूर

सुनवाई के दौरान DJB के पूर्व CEO और IAS अधिकारी उदित प्रकाश राय ने 3 सितंबर को अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति मांगी। उन्होंने अपनी अपील में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला दिया और बताया कि उन्हें क्लॉस्ट्रोफोबिया यानी बंद जगहों से डर लगता है। अदालत ने उनकी अपील को मंजूर कर लिया। ऐसे में 3 सितंबर को जब अदालत इस मामले में जमानत याचिका पर आदेश सुनाएगी, उदित प्रकाश राय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हो सकेंगे।

बचाव पक्ष ने कोर्ट में क्या-क्या दलीलें दीं

DJB के कथित STP टेंडर घोटाला मामले में सत्येंद्र जैन की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान उनके वकीलों ने गिरफ्तारी की जरूरत पर सवाल उठाए। वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन और अधिवक्ता विवेक जैन ने अदालत के सामने जैन की ओर से दलीलें रखीं। वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने दलील दी कि मई 2024 में FIR दर्ज होने के करीब 27 महीने बाद एसीबी ने सत्येंद्र जैन को गिरफ्तार किया। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि जैन ने जांच के दौरान हमेशा सहयोग किया। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि ACB ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) से मिली जानकारी के आधार पर FIR दर्ज की थी। वकीलों ने अदालत में कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सत्येंद्र जैन का कथित अपराध से हुई कमाई से कोई संबंध नहीं था।

सत्येंद्र जैन की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने STP की क्षमता बढ़ाने के फैसले को लेकर भी अपनी दलीलें रखीं। वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने अदालत को बताया कि STP की क्षमता को 15 MGD से बढ़ाकर 25 MGD करने का फैसला लिया गया था। उनके मुताबिक, यह निर्णय तकनीकी कमेटी की सिफारिश के आधार पर किया गया था। उन्होंने बताया कि STP की पीक क्षमता 30 MGD थी।

‘यह पॉलिसी से जुड़ा फैसला’

हरिहरन ने दलील दी कि यह मामला पॉलिसी से जुड़े फैसलों से संबंधित है और अदालतों से आम तौर पर पॉलिसी के मामलों में दखल देने की अपेक्षा नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि यदि अदालत जरूरी समझे तो आरोपी की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए कुछ शर्तें लगा सकती है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि सत्येंद्र जैन के भागने का कोई खतरा नहीं है, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। वरिष्ठ वकील ने अदालत में यह भी दलील दी कि ED के मामले में किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया था। बचाव पक्ष ने इन तमाम दलीलों के आधार पर सत्येंद्र जैन को जमानत दिए जाने की मांग की।

DJB के कथित STP टेंडर घोटाला मामले में सत्येंद्र जैन की जमानत अर्जी का एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने विरोध किया। एसीबी की ओर से पेश सरकारी वकील मनीष रावत ने अदालत में दलील दी कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और जमानत पर फैसला लेते समय इस पहलू को ध्यान में रखा जाना चाहिए। एसीबी ने यह भी आरोप लगाया कि सत्येंद्र जैन ने जांच के दौरान सहयोग नहीं किया। सरकारी वकील ने कहा कि जांच अभी जारी है और आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।

बचाव पक्ष बोला- मई 2024 से चल रही जांच

वहीं, सत्येंद्र जैन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने एसीबी की दलील का विरोध किया। उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी की ओर से अदालत में दी गई जानकारी मुख्य रूप से पॉलिसी से जुड़े फैसलों से संबंधित है। हरिहरन ने यह भी दावा किया कि एसीबी जिन दस्तावेजों का हवाला दे रही है, वे ED से प्राप्त हुए थे। उन्होंने जांच को शुरुआती चरण में बताए जाने पर भी सवाल उठाया और कहा कि यह जांच मई 2024 से चल रही है, इसलिए इसे शुरुआती चरण की जांच नहीं कहा जा सकता।

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