Business Desk- भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों (Foreign Portfolio Investors-FPI) और फॉरेन वेंचर कैपिटल इन्वेस्टर्स (FVCI) के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने बड़ा बदलाव किया है. अब इन निवेशकों को रजिस्ट्रेशन फीस अमेरिकी डॉलर (USD) में नहीं, बल्कि भारतीय रुपए (INR) में जमा करनी होगी. इसके लिए SEBI ने नियमों में संशोधन कर दिया है. यह नया नियम अधिसूचना जारी होने के छह महीने बाद लागू होगा.

अब डॉलर नहीं, भारतीय रुपए में होगी फीस
SEBI की ओर से 3 जुलाई को जारी अधिसूचना के मुताबिक, कैटेगरी-I FPI और FVCI के लिए रजिस्ट्रेशन फीस अब 2,500 अमेरिकी डॉलर की जगह 2.30 लाख रुपए तय की गई है. यानी विदेशी निवेशकों को अब डॉलर में भुगतान करने की जरूरत नहीं होगी. इससे भुगतान प्रक्रिया आसान होगी और विदेशी मुद्रा विनिमय दर (Exchange Rate) के उतार-चढ़ाव का असर भी कम होगा.
कॉमन एप्लिकेशन फॉर्म में भी बड़ा बदलाव
SEBI ने सिर्फ फीस भुगतान का तरीका ही नहीं बदला, बल्कि FPI रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले कॉमन एप्लिकेशन फॉर्म में भी संशोधन किया है. अब आवेदन करते समय आवेदकों को अपनी जन्मतिथि (Date of Birth) या कंपनी के गठन (Date of Incorporation) की तारीख अनिवार्य रूप से बतानी होगी. SEBI के अनुसार, इस बदलाव से परमानेंट अकाउंट नंबर (PAN) जारी करने की प्रक्रिया अधिक आसान और तेज होगी.
DDP पर भी बढ़ी जिम्मेदारी
नए नियमों के तहत डिजिग्नेटेड डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स (DDPs) की जिम्मेदारियां भी बढ़ा दी गई हैं. अब DDP को विदेशी निवेशकों से वसूली गई रजिस्ट्रेशन फीस भारतीय रुपए में SEBI के पास जमा करनी होगी. SEBI ने स्पष्ट किया है कि किसी FPI को रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी होने के बाद संबंधित DDP को पांच कार्य दिवस (5 Working Days) के भीतर यह फीस SEBI के खाते में जमा करनी होगी.
सिर्फ फीस नहीं, पूरी जानकारी भी देनी होगी
नए नियमों के तहत केवल फीस जमा करना पर्याप्त नहीं होगा. DDP को फीस के साथ SEBI द्वारा निर्धारित फॉर्मेट में जरूरी जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी. SEBI ने कहा है कि यह फॉर्मेट समय-समय पर बदला जा सकता है और DDP को उसी के अनुरूप सभी विवरण जमा करने होंगे. इससे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और निगरानी योग्य बनेगी.
किन मामलों पर लागू होगा नया नियम?
SEBI ने साफ किया है कि यह व्यवस्था केवल शुरुआती (Initial) रजिस्ट्रेशन पर लागू होगी. यानी जब कोई विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक पहली बार भारत में निवेश के लिए रजिस्ट्रेशन कराएगा, तभी DDP को उससे वसूली गई फीस और उससे जुड़ी पूरी जानकारी तय समयसीमा के भीतर SEBI को भेजनी होगी.
क्या होगा इस बदलाव का असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से विदेशी निवेशकों के लिए भुगतान प्रक्रिया आसान होगी. डॉलर में भुगतान की बाध्यता खत्म होने से एक्सचेंज रेट से जुड़ी अनिश्चितता भी कम होगी. साथ ही SEBI को रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की बेहतर निगरानी करने में मदद मिलेगी. नए नियमों का उद्देश्य विदेशी निवेशकों के लिए सिस्टम को अधिक पारदर्शी, सरल और डिजिटल बनाना है.

