Odisha Desk, भुवनेश्वर: नशे की लत पर अंकुश लगाने और मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान को मजबूत करने के उद्देश्य से ओडिशा सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने घोषणा की है कि राज्य की नई आबकारी नीति के तहत अगले तीन वर्षों तक ओडिशा में कोई भी नई शराब की दुकान नहीं खोली जाएगी।
भुवनेश्वर में कमिश्नरेट पुलिस द्वारा आयोजित ‘जीवन जिंदाबाद-2.0’ जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने यह ऐतिहासिक घोषणा की। इस अवसर पर उन्होंने नशा मुक्त भारत अभियान को गति देने के लिए एक समर्पित ‘निशा मुक्त भारत’ वेबसाइट का भी शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार नशीले पदार्थों और अवैध शराब के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’की नीति पर काम कर रही है।
नशे को व्यक्ति, परिवार और समाज को नष्ट करने वाला एक गंभीर अभिशाप बताते हुए मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे के दलदल से दूर रखकर शिक्षा, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों की ओर मोड़ना है। उन्होंने बताया कि ‘जीवन जिंदाबाद’ पहल के पहले चरण ने युवाओं में आत्महत्या की प्रवृत्तियों को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था, जबकि इसका दूसरा चरण एक स्वस्थ और नशा-मुक्त युवा पीढ़ी के निर्माण पर केंद्रित है।
राज्य में कड़े कदम उठाने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अवैध और जहरीली शराब के कारोबार के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को सीधे तौर पर जवाबदेह ठहराया जाएगा। उन्होंने पुलिस और आबकारी अधिकारियों को गांजा, अफीम, हेरोइन, कोकीन, ब्राउन शुगर और सिंथेटिक ड्रग्स जैसे उच्च जोखिम वाले नशीले पदार्थों के खिलाफ गहन जांच और कड़ा रुख अपनाने के निर्देश दिए।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने तंबाकू और निकोटीन युक्त पान मसाला तथा गुटखा पर लगाए गए प्रतिबंध का जिक्र किया और सभी शैक्षणिक संस्थानों को पूरी तरह से ‘ड्रग-फ्री जोन’ घोषित करने की बात कही।
2029 तक ओडिशा को पूरी तरह से नशा मुक्त बनाने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री माझी ने नागरिकों से इस संदेश को घर-घर तक पहुंचाने का आह्वान किया, “नशे को ना, जीवन को हां” (No to addiction, Yes to life)।
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