केरलम के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने पद संभालने के कुछ घंटे बाद ही लोकभवन में मांसाहारी खाना बनाने और परोसने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। उनके इस कदम की जानकारी लगते ही केरलम कांग्रेस और विपक्षी CPI(M) ने आलोचना की है। कांग्रेस ने कहा कि क्या अब राज्यपाल तय करेंगे कि क्या खाना है।
राज्यपाल कार्यालय के सूत्रों ने कहा कि माथुर शाकाहारी हैं। इसी वजह से उन्होंने यह बदलाव कराया। सूत्रों ने साफ किया कि लोकभवन के कर्मचारियों के खाने पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। माथुर ने शुक्रवार सुबह केरलम के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। केरल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सौमेन सेन ने उन्हें पद की शपथ दिलाई थी। जानकारी हो कि, केरलम में 97% लोग मांसाहारी हैं। जबकि देश में सबसे ज्यादा नॉन-वेज खाने वाले लोग तेलंगाना में हैं।
कांग्रेस ने कहा- राज्यपाल ने हद पार की
AICC महासचिव और अलप्पुझा लोकसभा सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि सिर्फ शाकाहारी खाना बनाने का निर्देश देकर राज्यपाल ने हद पार कर दी है। उन्होंने कहा कि केरलम की खान-पान की संस्कृति अलग है। तटीय राज्य होने के कारण यहां मछली भी बड़ी मात्रा में उपलब्ध है। राज्य के लोग शाकाहारी या मांसाहारी भोजन चुनने के लिए स्वतंत्र हैं।
राज्यपाल कार्यालय ने दी सफाई
सूत्रों के मुताबिक, लोकभवन की रसोई में तैयार खाना सिर्फ राज्यपाल और उनके निजी स्टाफ के कुछ सदस्यों को दिया जाता है। अन्य कर्मचारी या तो घर से खाना लाते हैं या बाहर खाना खाते हैं। सूत्रों ने कहा कि उनके खाने की पसंद पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।
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