शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा वनरक्षक, क्षेत्ररक्षक, जेल प्रहरी एवं सहायक जेल अधीक्षक भर्ती परीक्षा-2026 में गंभीर अव्यवस्थाओं हुई है। गड़बड़ियों के संबंध में कार्रवाई और अभ्यर्थियों को राहत प्रदान किए जाने की मांग को लेकर NSUI ने कर्मचारी चयन मंडल के कार्यालय में जमकर नारेबाजी की। संयुक्त परीक्षा नियंत्रक दिनेश अग्रवाल को अध्यक्ष के नाम ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर कार्यवाही एवं परीक्षार्थियों को राहत प्रदान करने की मांग की।
07 जून 2026 को भर्ती परीक्षा
एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने बताया कि कर्मचारी चयन मंडल द्वारा 07 जून 2026 को भर्ती परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों को गंभीर अव्यवस्थाओं, तकनीकी खामियों एवं प्रशासनिक लापरवाही का सामना करना पड़ा। प्रदेश के विभिन्न जिलों एवं अन्य राज्यों से हजारों अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए 100 किलोमीटर से लेकर 1000 किलोमीटर से पहुंचे थे। अनेक अभ्यर्थियों ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद यात्रा, आवास, भोजन एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर खर्च कर परीक्षा में शामिल होने की तैयारी की थी। परीक्षा केंद्रों पर पहुंचने के बाद उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के घंटों तक बैठाकर रखा गया।
तकनीकी खामियों का हवाला देकर परीक्षा निरस्त कर दी
बाद में तकनीकी खामियों का हवाला देकर परीक्षा निरस्त कर दी गई। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं चिंताजनक है। ऐसे में परीक्षा के दिन इस प्रकार की अव्यवस्था न केवल उनकी मेहनत को प्रभावित करती है, बल्कि उनकी मानसिक स्थिति एवं भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। परीक्षा के दौरान सामने आई घटनाओं से यह प्रतीत होता है कि परीक्षा आयोजन में गंभीर स्तर की लापरवाही बरती गई है। यदि तकनीकी व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित की जाती तो हजारों अभ्यर्थियों को इस प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। परीक्षा संचालन में गंभीर अनियमितताएं एवं धांधलियां हुई हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
एनएसयूआई की मांगें –
- परीक्षा निरस्त होने से प्रभावित सभी अभ्यर्थियों की परीक्षा शुल्क (Exam Fee) तत्काल वापस की जाए।
- परीक्षा आयोजन में हुई लापरवाही, तकनीकी खामियों एवं अव्यवस्थाओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों एवं संबंधित एजेंसियों की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों को तत्काल निलंबित एवं दंडित किया जाए।
- पुनः आयोजित होने वाली परीक्षा में सम्मिलित होने वाले सभी अभ्यर्थियों को यात्रा, आवास, भोजन एवं अन्य आवश्यक खर्चों की भरपाई हेतु विशेष आर्थिक सहायता/भत्ता प्रदान किया जाए।
- संपूर्ण घटनाक्रम की न्यायिक अथवा उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- पुनर्परीक्षा की तिथि पर्याप्त समय पूर्व घोषित की जाए ताकि अभ्यर्थियों को उचित तैयारी एवं यात्रा व्यवस्था का अवसर मिल सके।
- भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु परीक्षा केंद्रों की तकनीकी एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का पूर्व परीक्षण (Audit) अनिवार्य किया जाए।
- प्रभावित अभ्यर्थियों से लिखित शिकायतें प्राप्त कर उनकी समस्याओं का निराकरण करने हेतु विशेष हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रकोष्ठ स्थापित किया जाए।

