Dharm Desk – हिंदू धर्म में भगवान शंकर की पूजा का विशेष महत्व है। महादेव को खुश करने के लिए श्रद्धालु जल, बेलपत्र, धतूरा और भस्म चढ़ाते हैं। लेकिन प्राचीन धार्मिक परंपराओं के अनुसार कुछ ऐसी वस्तुएं भी हैं। जिन्हें शिवलिंग पर चढ़ाना मना है।

महादेव की पूजा में सिर्फ श्रद्धा ही नहीं बल्कि सही विधि और नियमों का पालन करना भी जरूरी माना जाता है। इसलिए शिवलिंग पर वही वस्तुएं चढ़ाना चाहिए जिन्हें शास्त्रों और परंपराओं में सही बताया गया है। कुछ वस्तुओं को अर्पित करने से पूजा की मर्यादा भंग होने की बात कही जाती है। इसलिए शिवलिंग पर कुछ भी चढ़ाने से पहले धार्मिक नियमों की जानकारी होना बहुत जरूरी होती हैं।

सिंदूर और कुमकुम

शिवलिंग पर सिंदूर या कुमकुम नहीं चढ़ाया जाता है। सिंदूर को सौभाग्य और शक्ति स्वरूप देवी की पूजा परंपरा से जोड़ा जाता है। भगवान शंकर वैरागी और पुरुष शक्ति के प्रतीक हैं।इसलिए उनकी पूजा में सिंदूर का उपयोग नहीं किया जाता है।

केतकी का फूल

भगवान शंकर की पूजा में केतकी के फूल का प्रयोग नहीं होता। पौराणिक कथाओं के अनुसार ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु के बीच श्रेष्ठता की बहस के दौरान केतकी के फूल ने भ्रामक प्रमाण दिया था जिससे बहुत गुस्सा होकर भगवान शिव ने इसे अपनी पूजा से रोक लगा दी।

हल्दी

शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाना वर्जित माना गया है। मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। जबकि हल्दी का संबंध सौंदर्य और स्त्रीत्व से है। इस वजह से शंकर जी की पूजा में हल्दी का उपयोग नहीं किया जाता।

शंख का जल

सामान्यत अनुष्ठानों में शंख से जल अर्पित करना शुभ माना जाता है।लेकिन शिवलिंग पर शंख से जल नहीं चढ़ाया जाता। पौराणिक कथाओं के अनुसार शंख की उत्पत्ति से जुड़ी पौराणिक कथाओं के कारण इसे शंकर जी की पूजा से दूर रखा गया है।

तुलसी दल

तुलसी को बहुत ही पवित्र माना जाता है।लेकिन शिवलिंग पर तुलसी अर्पित नहीं की जाती। धार्मिक प्रसंग के अनुसार पूर्व जन्म में तुलसी वृंदा थीं जो दैत्य जालंधर की पत्नी थीं। जालंधर के वध के कारण तुलसी का उपयोग शिव पूजा में वर्जित माना जाता है।