Odisha Desk, भुवनेश्वर: ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच सीमावर्ती कोटिया क्षेत्र को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा कोटिया क्षेत्र में पंचायत चुनाव कराने की एकतरफा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद ओडिशा सरकार ने इसके खिलाफ कड़ी कानूनी और राजनीतिक प्रतिक्रिया दी है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट ‘यथास्थिति’ के आदेश के बावजूद आंध्र प्रदेश द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर ओडिशा ने सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की है।

आंध्र प्रदेश सरकार के इस कदम को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का खुला उल्लंघन मानते हुए, ओडिशा प्रशासन ने कानूनी लड़ाई तेज कर दी है। ओडिशा की ओर से दायर याचिका में आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव, राज्य चुनाव आयुक्त, पंचायत राज सचिव और संबंधित जिलाधिकारियों समेत कई शीर्ष अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।

वर्ष 1936 में ओडिशा के अलग राज्य के रूप में गठन के बाद से ही कोटिया ग्राम पंचायत इसका अभिन्न अंग रहा है। वर्ष 1968 में यह सीमा विवाद पहली बार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जिसके बाद अदालत ने दोनों राज्यों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था।

कोटिया विवाद को लेकर राज्य की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। सत्ताधारी दल और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस संवेदनशील मुद्दे पर आम सहमति बनाने और एक एकजुट राजनीतिक रणनीति तैयार करने के लिए सरकार ने एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है। इसके साथ ही राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडल लगातार कोटिया क्षेत्र का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा ले रहे हैं, ताकि स्थानीय लोगों के अधिकारों और ओडिशा की संप्रभुता की पूरी रक्षा की जा सके।

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