भुवनेश्वर। भारत के परमाणु ऊर्जा मानचित्र पर ओडिशा जल्द ही एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है। राज्य के ऊर्जा सचिव विशाल कुमार देव ने पुष्टि की है कि टाटा समूह और अदानी समूह ने ओडिशा में परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए राज्य सरकार को अलग-अलग प्रस्ताव सौंपे हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ओडिशा सरकार अपने दीर्घकालिक ‘विजन 2036’ और ‘विजन 2047’ के तहत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) की संभावनाओं का आकलन कर रही है।
टाटा समूह ने राज्य के मलकानगिरी जिले में 200 मेगावाट क्षमता की चार परमाणु ऊर्जा इकाइयां (कुल 800 MW) स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, टाटा ने अपने संभावित निवेश के आंकड़ों का अभी पूरी तरह खुलासा नहीं किया है।
दूसरी ओर, अडानी समूह ने ओडिशा के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये के विशाल निवेश की घोषणा की है। अडानी के प्रस्ताव में कुल 6,000 मेगावाट क्षमता वाले दो परमाणु ऊर्जा संयंत्र शामिल हैं। इसके अलावा, समूह ने 2,400 मेगावाट का अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट, फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स और पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट्स स्थापित करने की योजना बनाई है।
ऊर्जा सचिव विशाल कुमार देव ने स्पष्ट किया है कि परमाणु संयंत्रों के लिए आवश्यक सख्त सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए सरकार बेहद सावधानीपूर्वक आगे बढ़ रही है। परमाणु संयंत्र की स्थापना के लिए व्यापक बफर जोन, प्रचुर मात्रा में शीतल जल की उपलब्धता, तथा बाढ़ और भूकंप जैसे जोखिमों से सुरक्षा अनिवार्य है।
यद्यपि इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय लिया जाना अभी बाकी है, लेकिन दोनों दिग्गजों के ये प्रस्ताव भारत के स्वच्छ ऊर्जा विस्तार और परमाणु ऊर्जा के विकास में ओडिशा की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हैं।
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