मऊ. वैसे तो प्रदेश जीरो टॉलरेंस पर जोर देते थकते नहीं, लेकिन सिस्टम में बैठे अधिकारी अपनी हरकतों से बाज नहीं आते. ऐसा ही एक मामला सामने आया है. जहां एक बुजुर्ग किसान के साथ चकबंदी बंदोबस्त अधिकारी ने बदसलूकी की और जातिवादी टिप्पणी करते हुए अपमानित किया. जो योगी सरकार के सुशासन की पोल खोलने के लिए काफी है. इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस ने सिस्टम पर सवाल खड़ा करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है.

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यूपी कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि उत्तर प्रदेश के मऊ जिले से सामने आया यह मामला बेहद शर्मनाक और व्यथित करने वाला है. किसान प्रहलाद का आरोप है कि चकबंदी बंदोबस्त अधिकारी राजीव उपाध्याय ने उनके गमछे के रंग को देखकर उन पर घृणित जातिवादी टिप्पणी की और सार्वजनिक रूप से उनका अपमान किया.

सभ्य समाज में प्रशासनिक पद पर बैठे किसी जिम्मेदार व्यक्ति द्वारा इस तरह की घटिया और आपराधिक मानसिकता का प्रदर्शन कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. पब्लिक सर्वेंट का काम जनता की सेवा करना और उन्हें सम्मान देना होता है, न कि अपनी कुर्सी के अहंकार में किसी गरीब किसान को जातिसूचक शब्दों से प्रताड़ित करना. ऐसे अधिकारी प्रशासनिक तंत्र पर कलंक हैं और इनके खिलाफ केवल लीपापोती नहीं, बल्कि सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए.

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जब अधिकारी खुलेआम किसान का जातिगत शोषण कर रहे हों, तब पीड़ित को केवल जांच का आश्वासन देना न्याय नहीं है. अगर भाजपा सरकार में किसान के स्वाभिमान की रत्ती भर भी कद्र बची है, तो जिलाधिकारी मऊ को तत्काल प्रभाव से इस अधिकारी को निलंबित कर एससी-एसटी एक्ट के तहत कठोर कदम उठाना चाहिए.