Dharm Desk – सोमवार का दिन देवाधिदेव महादेव को अत्यंत प्रिय है। शास्त्रों में विधान है कि इस दिन यदि पूर्ण निष्ठा और श्रद्धा भाव से शिवलिंग का अभिषेक किया जाए, तो भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों के सभी कष्टों को हर लेते है। शिव पुराण और विभिन्न धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवार के दिन शिवलिंग पर अर्पण की जाने वाली 5 विशेष वस्तुओं का अपना-अलग महत्व है। यदि सोमवर के पावन अवसर पर संपूर्ण विधि-विधान और पवित्र मन से इन 5 पवित्र द्रव्यों को शिवलिंग पर चढ़ाया जाए, तो महादेव की असीम कृपा से जीवन के समस्त दुख-दर्द दूर होते है। घर में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है। ये वस्तुएं न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है बल्कि जीवन में सुख, समृद्धि और पारिवारिक सामंजस्य भी लाती हैं। आइए जानते हैं कि वे कौन सी 5 चीजें हैं और उन्हें शिवलिंग पर अर्पित करने से क्या-क्या पुण्य फल प्राप्त होते हैं।

- दूध
शास्त्रों के अनुसार, भगवान भोले नाथ पर शुद्ध दूध अर्पित करने से घर-परिवार में खुश हाली आती है। यदि परिवार में संतान प्राप्ति की कामना हो या संतान की उन्नति की इच्छा हो, तो सोमबार के दिन शिवलिंग पर दूध अवश्य चढ़ाना चाहिए। इससे गृहस्थ जीवन में संतान सुख और वंश की निरंतर वृद्धि होती है।
- दही
यदि आपके परिवार में आए दिन मत भेद रहते हैं या आपसी सामंजस्य की कमी है, तो शिवलिंग का अभिषेक दही से करें। भगवान शिव पर दही अर्पित करने से पारिवरिक जीवन में मिठास आती है। घर के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम और स्नेह मजबूत होता है।
- घी
स्वास्थ्य और आरोग्य की प्राप्ति के लिए शिवलिंग पर शुद्ध देसी घी चढ़ाने का विशेष महत्व बतया गया है। मान्यता है कि शिवजी पर घी अर्पित करने से जातक को शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है तथा घर-परिवार से गंभीर बीमारियों का नाश होता है।
- शहद
जीवन में आर्थिक स्थिरता और सुख-समृद्धि पाने के लिए महादेव को शहद अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भगवान शंकर पर शदह की धारा बहाने से घर में धन, संपदा और वैभव में निरंतर वृद्धि होती है, जिससे जीवन के दरिद्रता रूपी अंधकार का नाश होता है ।
- शक्कर
घर के छोटे बच्चे जिद्दी स्वभाव के हो जाते है और कहना नहीं मानते। इसके समाधान के लिए शास्त्रों में एक बहुत ही सरल उपाय बताया है। यदि किसी बच्चे से अवधूत ईश्वर महा देव का नाम लेकर शक्कर या पिसी हुई खांड शिवलिंग पर अर्पित करवाई जाए, तो बच्चे का जिद्दीपन समाप्त होता है और उसके स्वभाव में नम्रता आती है।



