Dharm Desk :- हिंदू पंचांग में पंचक की अवधि को विशेष महत्व दिया जाता है। खासकर नए काम की शुरुआत को लेकर शुभ मुहूर्त देखा जाता है। पंचक के कुछ काम करने से बचने की सलाह दी जाती है। पंचक के पांच दिनों में दक्षिण दिशा की यात्रा, लकड़ी इकट्ठा करने, नई चारपाई बनवाने और मकान की छत डलवाने जैसे कार्यों को टालने की सलाह दी जाती हे।
इस बार अक्टूबर में पंचक की शुरुआत 21 अक्टूबर, बुधवार को होगी। बुधवार से शुरू होने के कारण इसे लेकर अलग-अलग ज्योतिषीय परंपराओं में अलग विचार मिलते है। ऐसे में पंचक के दौरान कौन से काम नहीं करने चाहिए और मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार से जुड़ी क्या परंपरा है, आइए जानते हैं।

कब से कब तक रहेगा पंचक का कार्यकाल
द्रिक पंचांग के अनुसार, अक्टूबर 2026 में पंचक 21 अक्टूबर, बुधवार को सुबह 7 बजे शुरू होगा और 25 अक्टूबर, रविवार को समाप्त होगा। पंचक उस अवधि को कहते हैं, जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के अंतिम चरण से लेकर शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र से होकर गुजरता है। इन पांच नक्षत्रों में चंद्रमा के संचरण की अवधि को पंचक कहा जाता है। पंचक की शुरुआत किस वार से होती है, इसके आधार पर भी इसके नाम और प्रभाव बताए जाते हैं। बुधवार और गुरुवार से शुरू होने वाले पंचक को कुछ परंपराओं में सामान्य माना जाता है। हालांकि, किसी मांगलिक कार्य का मुहूर्त तय करते समय संबंधित पंचांग देखना उचित रहता है।
पंचक में इन 5 कामों को करने से बचें
- पारंपरिक मान्यताओं में दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना गया है। इसलिए पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा टालने की सलाह दी जाती है। जरूरी होने पर परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।
- पंचक में लकड़ी, घास और दूसरी ज्वलनशील सामग्री जमा करने से बचने की मान्यता है। इसे अग्नि से जुड़े जोखिमों के साथ जोड़कर देखा जाता है।
- इस अवधि में नई चारपाई बुनने या पलंग बनवाने से बचने की परंपरा है। इसे पंचक के दौरान वर्जित माने जाने वाले कार्यों में गिना जाता है।
- मान्यता के अनुसार, पंचक में नए मकान की छत डलवाने से बचना चाहिए। हालांकि, निर्माण कार्य को लेकर निर्णय लेते सयम व्यावहारिक जरूरतों का भी ध्यान रखना जरूरी है।
- विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों के लिए पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखने की परंपरा है। हालांकि, पंकच में सभी मांगलिक कार्यों पर एक समान रोक नहीं मानी जाती।
पंचक में मृत्यु होने पर क्या करते हैं?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, पंचक के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार से पहले पंचक शांति से जुड़ी विशेष विधि की जाती है । कुछ परंपराओं में आटे या कुश से पांच प्रतीकात्मक पुतले बनाकर विधि-विधान करने का उल्लेख मिलता है । इसे पंचक दोष की शांति से जोड़ा जाता है। ऐसी स्थिति में परिवार को अपनी स्थानीय परंपरा के अनुसार अनुभवी पंडित से मार्गदर्शन लेना चाहिए। अंतिम संस्कार में अनावश्यक देरी करने के बजाय आवश्यक धार्मिक विधि के बारे में तुरंत सलाह लेना उचित है।

