पंचकूला: पंचकूला जिला परिषद में हुए करोड़ों रुपये के गबन मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। एडिशनल सेशंस जज अमित शर्मा की कोर्ट ने मामले के मुख्य आरोपी अनिल कुमार की नियमित जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। इसके साथ ही, कोर्ट ने मामले की जांच कर रहे सेक्टर-7 पुलिस थाने के तत्कालीन एसएचओ (SHO) इंस्पेक्टर राजेश कुमार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

FSL जांच में बड़ी लापरवाही आई सामने

अदालत में सुनवाई के दौरान सामने आया कि जिला परिषद के सीईओ के जाली हस्ताक्षरों से जुड़े इस बड़े घोटाले में पुलिस ने अब तक मुख्य दस्तावेजों को मिलान के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) ही नहीं भेजा है। तत्कालीन एसएचओ राजेश कुमार द्वारा दी गई दलीलों पर चिंता जताते हुए कोर्ट ने कहा कि पुलिस का यह रवैया आधुनिक जांच तकनीकों और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं की पूरी तरह अनदेखी को दर्शाता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की लचर जांच से पूरी न्याय प्रक्रिया में बाधा आ सकती है और निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।

कमिश्नर को दिए दखल के निर्देश

अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी अधिकारियों द्वारा जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे का बड़े पैमाने पर गबन किया गया है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस की जांच की गति बेहद धीमी और गैर-जिम्मेदाराना है। निचले तबके के कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के बजाय मुख्य दोषियों को लेकर कड़ा रुख नहीं अपनाया गया।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने इस आदेश की एक कॉपी सीधे पंचकूला पुलिस कमिश्नर को आधिकारिक माध्यम से भेजने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने पुलिस कमिश्नर से इस पूरे मामले को खुद संज्ञान में लेने और निष्पक्ष व वैज्ञानिक तरीकों से उचित जांच सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि सरकारी धन हड़पने वाले असली दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।