तनवीर खान, मैहर। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक नगर मैहर पहुंचे बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धर्मांतरण के मुद्दे पर विदेशी ताकतों और धर्मांतरण में लिप्त लोगों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में धर्मांतरण के प्रयास करने वालों की “ठठरी भी बरेगी और गठरी भी बरेगी, यह देश में नहीं चलेगा।” उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसे तत्वों को कड़ा संदेश दिया है।

मां शारदा देवी धाम पहुंचकर दर्शन और पूजन किया

शुक्रवार को ‘सनातन संवाद’ कार्यक्रम में शामिल होने मैहर पहुंचे पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने सबसे पहले त्रिकूट पर्वत पर स्थित मां शारदा देवी धाम पहुंचकर दर्शन और पूजन किया। इसके बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने धर्मांतरण, हिंदू एकता और जातिगत भेदभाव जैसे तमाम ज्वलंत मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।

मैहर को बताया पुण्य भूमि, कहा—यहां आने वाला कभी हारता नहीं

माँ शारदा के दरबार में हाजिरी लगाने पहुँचे पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने मैहर की महिमा का बखान करते हुए कहा कि यह पुण्य भूमि है, जहाँ माता सती का हार गिरा था। इस पावन धरा पर जो भी आता है, वह कभी हारता नहीं बल्कि जीतता है। उन्हें इस पुण्य भूमि के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

“सनातन हिंदू एकता यात्रा राजनीतिक नहीं, रामनैतिक यात्रा है”

अपनी बहुचर्चित ‘सनातन हिंदू एकता यात्रा’ के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह एक वैचारिक और ‘रामननैतिक यात्रा’ है। इसका मुख्य उद्देश्य समाज से जातिगत भेदभाव, छुआछूत और ऊंच-नीच की भावनाओं को मिटाकर एक समरस समाज का निर्माण करना है। उन्होंने संत कबीर की पंक्ति को दोहराते हुए कहा— “हरि का भजै सो हरि का होई, जात-पात पूछे नहीं कोई।”

विदेशी ताकतों और उन्माद से बचने की अपील

उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारा एकमात्र लक्ष्य हिंदुओं को एकजुट करना है। जिस दिन सनातन का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा, उस दिन भारत का अस्तित्व भी सुरक्षित नहीं रहेगा। विदेशी ताकतों के एजेंडे पर बोलते हुए पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने देशवासियों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं। उन्होंने चेताया कि विदेशी ताकतों के चंगुल में फंसकर हमें किसी भी तरह का उन्माद या दंगा नहीं करना है। हमें आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट रहना है और देश की सेना व सुरक्षा व्यवस्था के साथ मजबूती से खड़े रहना है।

जातिगत राजनीति पर तंज

जातिगत भेदभाव के नाम पर राजनीति करने वालों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि राजनेताओं को जातियों के नाम पर समाज को तोड़ना बंद करना चाहिए। “हमें आपस में लड़ाइए मत। असली राजनेता वही है, जो राष्ट्र के लिए जिए।” उन्होंने खुद को एक साधु बताते हुए कहा कि उन्हें राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है, उनका उद्देश्य केवल समाज को जोड़ना और सनातन संस्कृति की रक्षा करना है।

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